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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

जहां बिहार, वहां विकास: संजय भाई और जितेंद्र कुशवाहा पहुंचा रहे हैं जन-जन तक विकास का संदेश

जितेंद्र कुशवाहा, विशेष संवाददाता, 05 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली। बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और विकास की सोच को देशभर में पहुंचाने के उद्देश्य से समाजसेवी एवं बिहार के प्रति समर्पित कार्यकर्ता संजय भाई और जितेंद्र कुशवाहा लगातार जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनका मानना है कि बिहार केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, संघर्ष और विकास की प्रेरणादायक भूमि है, जिसकी पहचान देश और दुनिया में लगातार मजबूत हो रही है।
संजय भाई ने कहा कि बिहार ने देश को अनेक महान विभूतियां, विद्वान, समाज सुधारक और जननेता दिए हैं। आज बिहार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, उद्योग तथा सामाजिक विकास के क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इन सकारात्मक परिवर्तनों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि बिहार की वास्तविक तस्वीर लोगों के सामने आ सके।

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “जहां बिहार, वहां विकास” केवल एक नारा नहीं बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक चेतना का अभियान है। बिहार के लोगों ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के बल पर देश के हर हिस्से में अपनी पहचान बनाई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि बिहार की उपलब्धियों, सांस्कृतिक धरोहर और विकास कार्यों की जानकारी युवाओं तथा आम नागरिकों तक व्यापक रूप से पहुंचे।

दोनों समाजसेवियों ने कहा कि विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से बिहार के विकास मॉडल और उसकी सकारात्मक छवि को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही युवाओं को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से बिहार विकास, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। “जहां बिहार, वहां विकास” का संदेश लोगों को एकजुट कर राज्य और राष्ट्र के समग्र विकास की दिशा में प्रेरित करता रहेगा।




बुधवार, 30 सितंबर 2026

सुमित्रा देवी: बिहार की राजनीति में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल

 

बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्रियों में शामिल सुमित्रा देवी का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और सामाजिक प्रभाव की प्रेरक कहानी

बिहार। भारतीय राजनीति के इतिहास में अनेक ऐसी महिलाओं का योगदान रहा है, जिन्होंने सामाजिक बाधाओं को पार कर अपनी अलग पहचान बनाई। सुमित्रा देवी (कुशवाहा) का नाम भी ऐसी ही महिला नेताओं में लिया जाता है, जिनका जीवन महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक भागीदारी और समाज में महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए प्रेरणादायक है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुमित्रा देवी का जन्म 25 सितंबर 1922 को बिहार के तारापुर के निकट महेशपुर गांव में हुआ था। उन्होंने ऐसे दौर में सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई, जब राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज की तुलना में काफी सीमित थी। वर्ष 1952 में बिहार विधानसभा के लिए उनके निर्वाचित होने और राज्य की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनने का उल्लेख उनके राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में किया जाता है। उनके राजनीतिक सफर को उस समय की महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की एक प्रेरणा के रूप में देखा जा सकता है।

प्रभावशाली नेतृत्व और सामाजिक योगदान

सुमित्रा देवी की पहचान एक ऐसी महिला नेता के रूप में रही, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व, संवाद क्षमता और नेतृत्व के माध्यम से राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रभाव स्थापित किया। उनके बारे में प्रचलित स्मृतियों और स्थानीय चर्चाओं में उल्लेख मिलता है कि उनकी बातों को तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व भी गंभीरता से सुनता था। उनका व्यक्तित्व केवल राजनीतिक पद तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच उनकी सक्रियता और संवाद के लिए भी याद किया जाता है।

कुशवाहा समाज के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में भी सुमित्रा देवी का नाम महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से पटना में समाज की राजनीतिक भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में प्रतिनिधित्व की चर्चा करते समय उनके योगदान को याद किया जाता है। उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ स्थानीय विवरणों में पटना के कुशवाहा समाज के नेतृत्व और चंद्रमोहन बाबू के महापौर बनने का उल्लेख मिलता है। इन प्रसंगों का ऐतिहासिक महत्व समझने के लिए संबंधित अभिलेखों और समकालीन दस्तावेजों का अध्ययन आवश्यक है।

मौर्या कॉम्प्लेक्स से जुड़ी स्मृतियां

पटना के मौर्या कॉम्प्लेक्स की जमीन और उसके नामकरण को लेकर भी सुमित्रा देवी के विभागीय कार्यकाल से संबंधित चर्चाएं सुनने को मिलती हैं। यह प्रसंग उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी स्थानीय स्मृतियों का हिस्सा माना जाता है। हालांकि, इस संबंध की पुष्टि के लिए सरकारी अभिलेखों और विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोतों का सत्यापन जरूरी है।

महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा

सुमित्रा देवी के व्यक्तित्व की एक विशेषता सीखने की ललक, उदारता और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की क्षमता के रूप में वर्णित की जाती है। उनके मुस्कुराते चेहरे को याद करते हुए लोग उनके सहज व्यवहार और समस्याओं का सामना करने के तरीके को रेखांकित करते हैं। उनके जीवन से यह संदेश लिया जा सकता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और समाज के प्रति जिम्मेदारी किसी भी व्यक्ति को प्रभावशाली बना सकती है।

आज जब महिला सशक्तिकरण, समान अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा हो रही है, तब सुमित्रा देवी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के जीवन और योगदान का दस्तावेजीकरण महत्वपूर्ण है। उनकी यात्रा नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर देती है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

रिपोर्ट: जितेन्द्र कुशवाहा
सामाजिक जागरूकता टाइम्स




मंगलवार, 15 सितंबर 2026

स्वर्गीय तुलसीदास मेहता की 7वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, तेजस्वी यादव ने दी श्रद्धांजलि

 

रिपोर्टर : ललित सिंह अधिकारी पटना, 15 सितंबर 2026। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, प्रख्यात समाजवादी नेता एवं जननायक स्वर्गीय तुलसीदास मेहता जी की 7वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को एक भव्य स्मृति सभा एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं जनप्रतिनिधि संगठनों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर स्वर्गीय मेहता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माननीय श्री तेजस्वी प्रसाद यादव का गरिमामय आगमन हुआ। उन्होंने स्वर्गीय तुलसीदास मेहता जी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया तथा उनके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।

स्मृति सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय तुलसीदास मेहता जी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के वंचित, गरीब एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उन्होंने समाजवादी मूल्यों, सामाजिक न्याय, समानता और जनसेवा की भावना को अपने सार्वजनिक जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व और संघर्षशील व्यक्तित्व ने बिहार की राजनीति एवं सामाजिक जीवन में एक अमिट छाप छोड़ी है।

वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय मेहता जी की सादगी, ईमानदारी, जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता तथा समाज के प्रति समर्पण भाव आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके विचार और आदर्श समाज में समरसता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय तुलसीदास मेहता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।

स्वर्गीय तुलसीदास मेहता जी को विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

हैबतपुर हाजत मृत्यु प्रकरण: विधायक पप्पू वर्मा ने पीड़ित परिवार से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग

 

कुर्था (अरवल), 17 जुलाई 2026।हैबतपुर हाजत में उत्पाद विभाग की अभिरक्षा के दौरान हुई दुखद मृत्यु के बाद आज कुर्था विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक माननीय पप्पू वर्मा पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में वे पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

बिहार में उच्च शिक्षा का ऐतिहासिक अध्याय: 211 नवस्थापित डिग्री महाविद्यालयों में पठन-पाठन शुरू, भागलपुर के लिए कई बड़ी सौगातें

विधायक पप्पू वर्मा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की अभिरक्षा में मृत्यु अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को समुचित आर्थिक सहायता, सरकारी सुविधाएं तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वे हर स्तर पर उनके साथ रहेंगे तथा प्रशासन और सरकार के समक्ष उनकी आवाज को मजबूती से उठाएंगे। विधायक ने कहा कि कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब दोषियों को उनके कृत्य के अनुरूप दंड मिलेगा और पीड़ित परिवार को समय पर न्याय प्राप्त होगा।

इस अवसर पर सत्येंद्र रंजन, शिवपूजन सहाय, जितेंद्र पटेल (प्रदेश सचिव, जदयू बिहार), मिथलेश कुशवाहा, रामकिशोर, विजय सिंह, गुड्डू पटेल, विजय कुमार सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग का समर्थन किया।

इसके उपरांत विधायक पप्पू वर्मा चौहर पंचायत पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व सरपंच राजीव रंजन के ससुर के श्राद्ध कर्म में शामिल होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं तथा ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

नव नालन्दा महाविहार में मगही भाषा पाठ्यक्रम लागू करने की मांग, BWS और नालन्दा परिवार दिल्ली ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

विधायक पप्पू वर्मा ने कहा कि समाज में दुख-सुख की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना हमारी संस्कृति और सामाजिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दोनों परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए न्याय, संवेदनशील प्रशासन और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह दौरा न केवल पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करने का माध्यम बना, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जनप्रतिनिधियों की प्रतिबद्धता का भी संदेश देने वाला रहा।

गुरुवार, 16 जुलाई 2026

बिहार में उच्च शिक्षा का ऐतिहासिक अध्याय: 211 नवस्थापित डिग्री महाविद्यालयों में पठन-पाठन शुरू, भागलपुर के लिए कई बड़ी सौगातें

 

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा | प्रकाशित: 16 जुलाई 2026 भागलपुर,बिहार के लिए आज का दिन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। बिहार के लोकप्रिय एवं यशस्वी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के 211 नवस्थापित डिग्री महाविद्यालयों में पठन-पाठन कार्य का विधिवत शुभारंभ कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक प्रखंड तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने घर के निकट ही स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर जिले के ग्राम कासिल, पंचायत सालपुर, प्रखंड गोराडीह स्थित नवस्थापित राजकीय महाविद्यालय (उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, कासिल) परिसर का निरीक्षण किया तथा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेकर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय नागरिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के युवाओं को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भागलपुर के समग्र विकास को नई दिशा देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी कीं। उन्होंने बताया कि भागलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिससे बिहार के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही, ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया को तेज करते हुए अगले एक वर्ष के भीतर इसकी स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की घोषणा भी की। इसके अलावा, विक्रमशिला सेतु को आगामी 30 नवंबर तक पूर्ण रूप से चालू करने, मुंगेर से भागलपुर तक गंगा मरीन ड्राइव के निर्माण तथा कहलगांव से बटेश्वरधाम तक रोप-वे परियोजना को शीघ्र पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में उद्योग, पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाकर बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया जा सकता है। 211 नए डिग्री महाविद्यालयों में पठन-पाठन की शुरुआत न केवल लाखों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की नई पहचान भी स्थापित करेगी। भागलपुर के लिए घोषित नई योजनाएँ आने वाले वर्षों में इसे शिक्षा, उद्योग, पर्यटन और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

बुधवार, 1 जुलाई 2026

नव नालन्दा महाविहार में मगही भाषा पाठ्यक्रम लागू करने की मांग, BWS और नालन्दा परिवार दिल्ली ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

 

विशेष संवाददाता के. एल. गुप्ता की रिपोर्ट नालन्दा, बिहार: मगही भाषा के संरक्षण, संवर्धन और शैक्षणिक विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बिहारी वेल्फेयर सोसाइटी (BWS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मगही भाषा आंदोलन के प्रमुख संजय भाई तथा नालन्दा परिवार दिल्ली (NPD) के अध्यक्ष एवं मगही बयार के सम्पादक प्रोफेसर (डॉ.) आनन्द वर्धन जी ने नव नालन्दा महाविहार (डीम्ड विश्वविद्यालय), नालन्दा के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि नव नालन्दा महाविहार जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में मगही भाषा को पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाए, ताकि मगध क्षेत्र की प्राचीन एवं समृद्ध भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

इस अवसर पर संजय भाई ने कहा कि मगही भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि मगध की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ी हुई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इसके अध्ययन की व्यवस्था होने से भाषा के शोध, लेखन और प्रचार-प्रसार को नई दिशा मिलेगी।

प्रोफेसर (डॉ.) आनन्द वर्धन जी ने कहा कि मगही भाषा का साहित्य और लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध है। इसके संरक्षण के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नव नालन्दा महाविहार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा।

मगही भाषा आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस पहल को भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मगही को शिक्षा, शोध और प्रशासनिक स्तर पर बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूती मिलेगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान मगही भाषा प्रेमियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मगही भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए अपने विचार रखे।

यह पहल मगध की विरासत, भाषा और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।

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