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बुधवार, 7 जनवरी 2026

शिक्षा जागरूकता के लिए समर्पित हैं जितेंद्र कुशवाहा

समाज में शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि शिक्षा ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसी सोच के साथ वे गांव से लेकर शहर तक हर मंच, हर कार्यक्रम और हर बैठक में शिक्षा का संदेश मजबूती से रखते हैं।
जितेंद्र कुशवाहा बार-बार एक ही बात दोहराते हैं—
“दो रोटी कम खाइए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाइए।”
उनका यह कथन केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को झकझोरने वाली अपील है। वे कहते हैं कि आज थोड़ी सी मेहनत और त्याग करके अगर बच्चों को शिक्षा दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी अपने परिवार और समाज दोनों का भविष्य बदल सकती है।
मैं स्वयं भी उनके साथ शिक्षा जागरूकता अभियानों में सहभागी रहा हूं और उनके विचारों से प्रेरित होकर यह अनुभव किया है कि जब समाज को सही दिशा दिखाई जाती है, तो सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में मैंने देखा है कि उनके शब्द बच्चों और युवाओं के मन में नई आशा, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण पैदा करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से वे अभिभावकों को जागरूक करते हैं कि बच्चों को मजदूरी या छोटे कामों में झोंकने के बजाय शिक्षा से जोड़ें। बेटियों की शिक्षा को वे समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हैं।
जितेंद्र कुशवाहा का शिक्षा जागृति अभियान आज युवाओं और बच्चों के बीच चेतना का संचार कर रहा है। उनका संदेश स्पष्ट है—शिक्षा ही सम्मान, स्वाभिमान और सशक्त भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।