नई दिल्ली। “कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…” यह पंक्ति 32 वर्षीय डॉ. बिभु आनंद बिस्वास की सफलता की कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने दिल्ली जैसे महानगर में अपना मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल स्थापित कर एक मिसाल कायम की है।
सीमित संसाधनों और संघर्षों के बीच पले-बढ़े डॉ. बिभु ने बचपन से ही डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का सपना देखा था। उनकी शुरुआती पढ़ाई मिथिला पब्लिक स्कूल, बिहार से हुई। उनके पिता अमरनाथ एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और बाद में उन्होंने एक स्कूल खोलकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया। वहीं उनकी माता सुषमा भी उसी स्कूल में प्रिंसिपल रहीं और समाज सेवा से जुड़ी रहीं। परिवार से मिले संस्कारों ने डॉ. बिभु को समाज सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
डॉ. बिभु ने काठमांडू यूनिवर्सिटी के नोबेल मेडिकल कॉलेज टीचिंग हॉस्पिटल से वर्ष 2013 से 2019 के बीच एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने गंगाराम इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से डीएनबी मेडिसिन किया। 2019 से 2022 तक उन्होंने Dr. Ram Manohar Lohia Hospital में जूनियर रेजिडेंट के रूप में सेवाएं दीं।
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने वैक्सीनेशन इंचार्ज बनकर लोगों की सेवा की और हजारों लोगों को टीका लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समर्पण और सेवाभाव को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी उन्हें सम्मानित किया।
डॉ. बिभु का सपना था कि दिल्ली में एक ऐसा अस्पताल बने जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उनका यह सपना तब साकार हुआ जब उन्होंने Healing Hands Multispeciality Clinic की स्थापना की। लगभग 88 स्क्वायर यार्ड में बने इस अस्पताल में चार मंजिलें हैं, जहां ओपीडी, फार्मेसी, ऑपरेशन थिएटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। जल्द ही यहां एंबुलेंस सेवा भी शुरू की जाएगी।
इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने भी डॉ. बिभु आनंद बिस्वास को बधाई देते हुए कहा कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि डॉ. बिभु आनंद जैसे समर्पित डॉक्टर ने गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए अस्पताल की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे डॉक्टर समाज के लिए प्रेरणा होते हैं और उनकी यह पहल स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
बिहार के छोटे से गांव से दिल्ली में अपना अस्पताल खड़ा करने तक की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर इंसान के अंदर जुनून, मेहनत और समाज के प्रति सेवा भाव हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। डॉ. बिभु आनंद बिस्वास आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं।

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