प्रख्यात समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने एक सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “शिक्षा दुनिया की सबसे बड़ी पूंजी है। जब तक हम और हमारे सभी सामाजिक संगठन अपने-अपने स्तर पर जमीनी स्तर से कार्य नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चों और युवाओं तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अपने उद्बोधन में श्री कुशवाहा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़े तो हम दो रोटी कम खा लें, लेकिन बच्चों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में नहीं रुकनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर, सशक्त और जागरूक राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आज सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। छात्रवृत्ति, निःशुल्क शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल लर्निंग जैसी अनेक योजनाएं समाज के वंचित वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जागरूक नागरिकों को भी आगे आकर इन योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचानी होगी, ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े युवा साथी भी इनका लाभ उठा सकें।
श्री कुशवाहा ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। गांव-गांव, बस्ती-बस्ती जाकर बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाना होगा। विशेष रूप से उन परिवारों को प्रेरित करना होगा, जहां आर्थिक या सामाजिक कारणों से बच्चों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। उन्होंने सामाजिक संगठनों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं और संयुक्त रूप से अभियान चलाकर शैक्षिक वातावरण को मजबूत करें।
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता प्रदान करती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं शिक्षित बनें और अपने आसपास के कम से कम एक जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा में सहयोग अवश्य करें।
ज्ञात हो कि जितेंद्र कुशवाहा लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विभिन्न सामाजिक अभियानों के माध्यम से वे निरंतर समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान की रोशनी पहुंचाने का संकल्प लिया।










