आज देश में बढ़ते सड़क हादसे एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन चुके हैं। विशेष रूप से युवाओं में यातायात नियमों के उल्लंघन की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। हेलमेट न पहनना, तेज रफ्तार में वाहन चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग करना और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करना अब जैसे शौक बनता जा रहा है। युवा शक्ति दिखाने और साथियों के बीच खुद को साबित करने की होड़ में न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि सड़क पर चल रहे निर्दोष लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल रहे हैं।
आए दिन देखने को मिलता है कि बिना हेलमेट बाइक दौड़ाई जा रही है, क्षमता से अधिक स्पीड में वाहन चलाए जा रहे हैं और नियमों को तोड़ना बहादुरी समझा जा रहा है। सरकार द्वारा समय-समय पर यातायात नियमों के पालन को लेकर जागरूकता संदेश, अभियान और कड़े कानून लागू किए जाते हैं, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी थम नहीं रही। इसका परिणाम यह है कि देश में हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं और कई परिवार हमेशा के लिए उजड़ जाते हैं।
समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वाहन चलाते समय संयम और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। सड़क पर चलने वाला हर व्यक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए जिम्मेदार होता है। आपकी एक छोटी सी गलती किसी परिवार को जीवन भर की मजबूरी और दुख दे सकती है। पैदल यात्रियों की सुरक्षा, नियमों का पालन और धैर्यपूर्ण ड्राइविंग ही एक सच्चे नागरिक की पहचान है।
उन्होंने सभी युवाओं और वाहन चालकों से अपील की कि वे यातायात नियमों का पूर्ण पालन करें, सुरक्षित वाहन चलाएं और देश को सड़क दुर्घटनाओं से मुक्त बनाने में अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाएं। सुरक्षित सड़कें ही सुरक्षित भविष्य की नींव हैं।

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