जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान श्रीकृष्ण और सुदामा की पवित्र मित्रता से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया, जिसमें सम्राट सिन्हा ने सुदामा के चरित्र को अपनी प्रभावशाली अभिनय कला के माध्यम से जीवंत कर दिया।
सम्राट सिन्हा ने अपने अभिनय के माध्यम से सुदामा की सादगी, गरीबी, भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम और दोनों मित्रों के पवित्र संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी भाव-भंगिमा, संवाद अदायगी और अभिनय शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन से जुड़ा भावनात्मक प्रसंग कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इस दृश्य को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सम्राट सिन्हा के शानदार अभिनय की सराहना की।
सुदामा का चरित्र भारतीय संस्कृति में सच्ची मित्रता, त्याग, प्रेम, सादगी और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। सम्राट सिन्हा ने अपने अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि सच्चे रिश्ते धन-दौलत से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण से मजबूत होते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाग लिया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।
उपस्थित लोगों ने सम्राट सिन्हा की प्रतिभा की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि सुदामा के चरित्र को मंच पर सजीव कर दिया। उनकी शानदार प्रस्तुति जन्माष्टमी समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।
श्री आद्या कात्यायनी शक्ति पीठ मंदिर, छतरपुर, नई दिल्ली में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिया।
रिपोर्टर: अमित कुमार, छतरपुर, नई दिल्ली
— सामाजिक जागरूकता टाइम्स

