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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

उपेन्द्र कुशवाहा को ‘प्रबुद्ध राष्ट्रवाद’ बुकलेट भेंट, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

उपेन्द्र कुशवाहा को एडवोकेट हेमंत कुमार मौर्य द्वारा ‘प्रबुद्ध राष्ट्रवाद – भारत की असली पहचान’ बुकलेट भेंट करते हुए
एनडीए के कद्दावर नेता एवं राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा को भेंट की गई 'प्रबुद्ध राष्ट्रवाद – भारत की असली पहचान' बुकलेट

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एडवोकेट हेमंत कुमार मौर्य ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एनडीए के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद Upendra Kushwaha से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अपनी वैचारिक पुस्तिका "प्रबुद्ध राष्ट्रवाद – भारत की असली पहचान" उन्हें भेंट की।

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मुलाकात के दौरान देश, समाज और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। विशेष रूप से शिक्षा, सामाजिक समरसता, युवाओं की भागीदारी, राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका तथा समाज के वंचित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान जैसे मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अधिवक्ता हेमंत कुमार मौर्य ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, संविधान के आदर्शों और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने "प्रबुद्ध राष्ट्रवाद – भारत की असली पहचान" बुकलेट तैयार की है, जो राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सोच का संदेश देती है।

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राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा ने बुकलेट प्राप्त कर प्रसन्नता व्यक्त की तथा इस प्रकार के वैचारिक और रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता, शिक्षा और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने वाले प्रयास लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाते हैं। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का भी संदेश दिया।

मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। उपस्थित लोगों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के वैचारिक संवाद समाज में सकारात्मक परिवर्तन, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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🖋️ रिपोर्ट: अनीत मौर्य
📝 संपादक: जितेंद्र कुशवाहा (सामाजिक जागरूकता टाइम्स)

भिखारी ठाकुर की 55वीं पुण्यतिथि: आज के युवाओं के लिए प्रेरणा | जितेंद्र कुशवाहा

लेखक: समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा प्रकाशन: सामाजिक जागरूकता टाइम्स

"जिस समाज का युवा अपनी संस्कृति, भाषा और लोकनायकों को भूल जाता है, वह समाज अपनी पहचान भी धीरे-धीरे खो देता है।"

10 जुलाई 1971 को भोजपुरी साहित्य, लोकनाट्य और जनजागरण के महानायक भिखारी ठाकुर इस संसार से विदा हुए। उनकी विरासत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। उनकी 55वीं पुण्यतिथि केवल एक महान लोक कलाकार को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी समय है कि आज का युवा उनके विचारों से क्या सीख सकता है।

भिखारी ठाकुर को केवल "भोजपुरी के शेक्सपियर" कहना पर्याप्त नहीं होगा। वे एक लेखक, लोकनाटककार, गीतकार, अभिनेता, निर्देशक और सबसे बढ़कर समाज सुधारक थे। उन्होंने उस दौर में समाज की उन समस्याओं को मंच पर उतारा, जिन पर खुलकर बात करना भी आसान नहीं था। बाल विवाह, दहेज प्रथा, बेटियों की खरीद-फरोख्त, पलायन, जातिगत भेदभाव, महिलाओं की पीड़ा और सामाजिक असमानता जैसे विषयों को उन्होंने लोकभाषा के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाया।

आज जब हम 21वीं सदी में खड़े हैं, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या भिखारी ठाकुर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं? मेरा उत्तर है—पहले से भी अधिक।

बदलता समय, वही चुनौतियाँ

आज तकनीक ने दुनिया को बदल दिया है। मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने युवाओं को वैश्विक मंच दे दिया है। लेकिन दूसरी ओर, समाज नई चुनौतियों से भी जूझ रहा है। बेरोज़गारी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, सोशल मीडिया की लत, मानसिक तनाव, पारिवारिक दूरी, सांस्कृतिक विघटन और भाषा से बढ़ती दूरी युवाओं के सामने गंभीर प्रश्न बनकर खड़े हैं।

भिखारी ठाकुर का साहित्य हमें बताता है कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना होती है। यदि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे, तो आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बना सकेंगे।

"बिदेसिया" आज भी क्यों प्रासंगिक है?

भिखारी ठाकुर का प्रसिद्ध नाटक "बिदेसिया" उस दौर के पलायन की कहानी था। आज भी लाखों युवा रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में अपने गाँव और परिवार से दूर महानगरों या विदेशों में जाते हैं।

समय बदला है, लेकिन भावनाएँ नहीं बदलीं। आज भी माता-पिता अपने बच्चों के लौटने का इंतज़ार करते हैं। आज भी गाँव प्रतिभाओं के पलायन से खाली होते जा रहे हैं। इसलिए "बिदेसिया" केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की एक सतत सच्चाई है।

आज के युवाओं को यह समझना होगा कि सफलता केवल बड़े शहरों में नहीं, बल्कि अपने समाज और अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देने में भी है।

बेटियों के सम्मान का संदेश

भिखारी ठाकुर का "बेटी बेचवा" केवल एक नाटक नहीं था, बल्कि समाज के सामने एक आईना था। उन्होंने उस समय बेटियों के अधिकारों की बात की, जब महिलाओं की आवाज़ को अक्सर दबा दिया जाता था।

आज परिस्थितियाँ बदली हैं। बेटियाँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और राजनीति हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। फिर भी दहेज, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

आज के युवा यदि वास्तव में भिखारी ठाकुर को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उन्हें महिलाओं के सम्मान, समान अवसर और सुरक्षित समाज के निर्माण का संकल्प लेना होगा।

अपनी भाषा पर गर्व करें

भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी को केवल बोली नहीं माना, बल्कि जनभावनाओं की भाषा बनाया। उन्होंने सिद्ध किया कि मातृभाषा में समाज की आत्मा बसती है।

आज का युवा अंग्रेज़ी और आधुनिक शिक्षा अवश्य प्राप्त करे, लेकिन अपनी मातृभाषा—चाहे वह भोजपुरी, मगही, मैथिली, अवधी, ब्रज, हरियाणवी या कोई अन्य भारतीय भाषा हो—पर गर्व करना भी उतना ही आवश्यक है।

जो युवा अपनी भाषा और संस्कृति का सम्मान करता है, वही दुनिया के सामने अपनी अलग पहचान बना सकता है।

सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग

यदि आज भिखारी ठाकुर जीवित होते, तो संभवतः वे भी सोशल मीडिया का उपयोग समाज सुधार के लिए करते। वे छोटे-छोटे वीडियो, लोकगीत, नाटक और संवादों के माध्यम से करोड़ों लोगों तक अपना संदेश पहुँचाते।

आज के युवाओं के हाथ में मोबाइल है। प्रश्न यह नहीं कि मोबाइल अच्छा है या बुरा। प्रश्न यह है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

यदि सोशल मीडिया पर नफ़रत के बजाय जागरूकता, अश्लीलता के बजाय संस्कृति, अफवाहों के बजाय सत्य और नकारात्मकता के बजाय प्रेरणा साझा की जाए, तो वही भिखारी ठाकुर के विचारों का वास्तविक विस्तार होगा।

समाज सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि

भिखारी ठाकुर ने समाज की पीड़ा को महसूस किया। उन्होंने केवल समस्याएँ नहीं गिनाईं, बल्कि लोगों को सोचने और बदलने की प्रेरणा दी।

आज का युवा यदि किसी गरीब बच्चे की शिक्षा में सहयोग करता है, किसी जरूरतमंद परिवार की सहायता करता है, रक्तदान करता है, पर्यावरण संरक्षण में भाग लेता है, नशा मुक्ति अभियान चलाता है या सामाजिक एकता के लिए कार्य करता है, तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन

आधुनिक बनना आवश्यक है, लेकिन अपनी संस्कृति को छोड़ देना बुद्धिमानी नहीं है। भिखारी ठाकुर हमें सिखाते हैं कि आधुनिक विचारों को अपनाते हुए भी अपनी लोक परंपरा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सकता है।

आज का युवा यदि लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाटक और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाएगा, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी पहचान पर गर्व करेंगी।

युवाओं के लिए पाँच संदेश

भिखारी ठाकुर के जीवन से आज का युवा पाँच महत्वपूर्ण बातें सीख सकता है—

  1. संघर्ष से कभी मत डरिए।

  2. अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व कीजिए।

  3. समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनिए।

  4. महिलाओं का सम्मान और समानता सुनिश्चित कीजिए।

  5. अपनी प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के विकास के लिए भी कीजिए।

आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

आज देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि समाज बदलने वाले हों; जो केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय न हों, बल्कि समाज के बीच भी सक्रिय हों; जो केवल सफलता की बात न करें, बल्कि जिम्मेदारी भी निभाएँ।

भिखारी ठाकुर का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि इरादे मजबूत हों, तो एक साधारण व्यक्ति भी इतिहास रच सकता है।


        निष्कर्ष भिखारी ठाकुर की 55वीं पुण्यतिथि पर हम उन्हें केवल पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि न दें, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें। यदि आज का युवा उनकी संवेदनशीलता, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और जनसेवा की भावना को अपनाता है, तो यही उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।

मैं सभी युवाओं से आग्रह करता हूँ कि अपने मोबाइल की स्क्रीन से बाहर निकलकर समाज की वास्तविक समस्याओं को भी देखें। शिक्षा प्राप्त करें, आत्मनिर्भर बनें, अपने माता-पिता का सम्मान करें, अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ें तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।

भिखारी ठाकुर ने कलम और मंच को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया था। आज हमारे पास तकनीक, शिक्षा और अवसर हैं। यदि हम इन साधनों का उपयोग जनजागरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए करें, तो यही उनके सपनों के भारत की दिशा में हमारा योगदान होगा।

आइए, भिखारी ठाकुर की 55वीं पुण्यतिथि पर हम यह संकल्प लें कि उनकी लोकचेतना, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाएँगे। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

आलू मोड़ पर MCD की लापरवाही, कूड़े में प्लास्टिक खा रही हैं गौ माता

भाटी माइंस के आलू मोड़ पर MCD की लापरवाही के कारण कूड़े के ढेर में प्लास्टिक खाती गौ माता।नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के भाटी माइंस स्थित आलू मोड़ क्षेत्र में नगर निगम (MCD) की सफाई व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण डस्टबिन के आसपास कूड़े का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना हुआ है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार, सफाई कर्मचारी प्रतिदिन केवल डस्टबिन के अंदर मौजूद कचरे को उठाकर चले जाते हैं, जबकि डस्टबिन के बाहर फैला प्लास्टिक, कागज़, पॉलीथिन, खाद्य सामग्री का कचरा और अन्य गंदगी वहीं पड़ी रहती है। धीरे-धीरे यह कूड़ा एक बड़े ढेर का रूप ले लेता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि कचरे से मच्छर और मक्खियाँ पनपने लगती हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे स्वच्छता अभियान के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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बाल लेखक अविक अरोड़ा की पुस्तक का विमोचन, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मिला आशीर्वाद

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कूड़े के ढेर में गौ माता और अन्य आवारा पशु भोजन की तलाश में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य हानिकारक अपशिष्ट खा रहे हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार प्लास्टिक का सेवन पशुओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। इससे उनके पाचन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, कई बार जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कूड़े का उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो यह न केवल पशुओं बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

निवासियों का कहना है कि यदि सफाई कर्मचारी डस्टबिन के साथ-साथ उसके आसपास फैले कचरे की भी नियमित सफाई करें, तो क्षेत्र को साफ-सुथरा और स्वच्छ रखा जा सकता है। उनका मानना है कि केवल डस्टबिन खाली कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास की सफाई भी उतनी ही आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि आलू मोड़ क्षेत्र की सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए तथा संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि डस्टबिन के आसपास फैले कचरे को भी प्रतिदिन हटाया जाए तथा खुले में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट न पड़े रहें। इससे क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और गौ माता सहित अन्य पशुओं का जीवन भी सुरक्षित रह सकेगा।📖 यह भी पढ़ें :जनपथ मार्केट का इतिहास: दिल्ली के सबसे लोकप्रिय बाजार की पूरी कहानी

क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि नगर निगम इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करेगा, ताकि भाटी माइंस के आलू मोड़ क्षेत्र को गंदगी, दुर्गंध और खुले कचरे से मुक्ति मिल सके।

🖊️ रिपोर्ट: अमित कुमार झा, संवाददाता
भाटी माइंस, नई दिल्ली

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

बाल लेखक अविक अरोड़ा की पुस्तक का विमोचन, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मिला आशीर्वाद

                       

विशेष संवाददाता: अनूप मौर्य नई दिल्ली, 30 जुलाई 2026होनहार छात्र एवं युवा बाल लेखक अविक अरोड़ा ने कम आयु में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पुस्तक "Punch: End of Alone" का सफलतापूर्वक प्रकाशन किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।

पुस्तक के प्रकाशन के उपलक्ष्य में अविक अरोड़ा ने भारत सरकार के माननीय श्री चिराग पासवान, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर माननीय मंत्री ने पुस्तक का अवलोकन किया, अविक के साहित्यिक प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ एवं अपना स्नेहिल आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि देश के बच्चों की प्रतिभा को उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।

इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने अविक अरोड़ा को उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके माता-पिता के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "अविक की यह सफलता केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सफलता है। ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों की उपलब्धियाँ समाज के लिए प्रेरणादायक होती हैं। इससे अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने, बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की शक्ति एवं आत्मविश्वास मिलेगा। किसी भी बच्चे की सफलता के पीछे उसके माता-पिता के संस्कार, प्रोत्साहन और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मैं अविक और उनके परिवार को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।"

अविक अरोड़ा की इस उपलब्धि पर डॉ. विभु आनंद, संजय भाई, अमित कुमार, सुभोध कुमार, अशोक पंडित, संतोष कुमार पंडित, मिंटू कुमार तथा रमेश कुमार ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें एवं उनके परिवार को बधाई दी। सभी ने कहा कि कम आयु में साहित्य सृजन करना अत्यंत सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अविक भविष्य में भी अपने लेखन से समाज को सकारात्मक दिशा देंगे तथा देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।

अविक अरोड़ा की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम, पारिवारिक सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के बल पर कम आयु में भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं। यह उपलब्धि देशभर के विद्यार्थियों, युवा लेखकों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

बुधवार, 29 जुलाई 2026

जनपथ मार्केट का इतिहास: दिल्ली के सबसे लोकप्रिय बाजार की पूरी कहानी

जनपथ मार्केट: इतिहास, विरासत और आधुनिक दिल्ली की पहच

लेखक: जितेंद्र कुशवाहानई दिल्ली की पहचान केवल संसद भवन, इंडिया गेट और कर्तव्य पथ तक सीमित नहीं है। राजधानी की सांस्कृतिक और व्यावसायिक धड़कन को समझना हो तो जनपथ मार्केट का रुख करना चाहिए। कनॉट प्लेस के निकट स्थित यह बाजार वर्षों से देश-विदेश के पर्यटकों, युवाओं, कलाकारों और खरीदारी के शौकीनों का पसंदीदा केंद्र बना हुआ है। जनपथ केवल एक बाजार नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति, हस्तशिल्प और उद्यमिता का जीवंत प्रतीक है।

ब्रिटिश शासन के दौरान आज के जनपथ मार्ग को "क्वीन्स वे" के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद औपनिवेशिक नामों को भारतीय पहचान देने की प्रक्रिया में इसका नाम बदलकर "जनपथ" रखा गया, जिसका अर्थ है "जनता का मार्ग"। नई दिल्ली के विकास के साथ इस क्षेत्र ने भी तेजी से व्यावसायिक रूप धारण किया और देखते ही देखते यह राजधानी के प्रमुख बाजारों में शामिल हो गया।

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जनपथ मार्केट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सांस्कृतिक विविधता है। यहां कश्मीर के पश्मीना शॉल, राजस्थान की हस्तनिर्मित कलाकृतियां, गुजरात की कढ़ाई, पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक उत्पाद, तिब्बती हस्तशिल्प और भारतीय कारीगरों द्वारा निर्मित अनेक आकर्षक वस्तुएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। यही कारण है कि विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति की झलक अपने साथ स्मृति-चिह्न के रूप में यहां से लेकर जाते हैं।

यह बाजार विशेष रूप से युवाओं के बीच फैशन हब के रूप में लोकप्रिय है। आधुनिक डिजाइन की कुर्तियां, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी, हैंडबैग, स्कार्फ, फैशन एक्सेसरीज और घरेलू सजावटी वस्तुएं यहां किफायती दामों पर उपलब्ध होती हैं। यहां खरीदारी का सबसे रोचक अनुभव मोलभाव की परंपरा है, जो भारतीय बाजार संस्कृति की विशेष पहचान मानी जाती है।

आज डिजिटल युग में भी जनपथ मार्केट अपनी लोकप्रियता बनाए हुए है। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते प्रभाव के बावजूद लोग यहां खरीदारी के साथ-साथ दिल्ली की जीवंत संस्कृति का अनुभव लेने आते हैं। दिल्ली मेट्रो की बेहतर कनेक्टिविटी ने इस बाजार तक पहुंचना और भी आसान बना दिया है। जनपथ और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से यह बाजार पैदल दूरी पर स्थित है।

नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) द्वारा समय-समय पर बाजार के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार के प्रयास किए गए हैं। इससे बाजार अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यटकों के अनुकूल बना है। हालांकि पार्किंग की समस्या, बढ़ती भीड़ और ऑनलाइन बाजार की प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं।

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जनपथ मार्केट हजारों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। यहां का प्रत्येक स्टॉल भारत की किसी न किसी कला, परंपरा और स्थानीय उद्यम की कहानी कहता है। ऐसे बाजार न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं, बल्कि "वोकल फॉर लोकल" और "मेक इन इंडिया" जैसे अभियानों को भी वास्तविक आधार प्रदान करते हैं।

भविष्य में यदि जनपथ मार्केट में विरासत संरक्षण, डिजिटल सूचना प्रणाली, स्मार्ट पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाती हैं, तो यह विश्व के प्रमुख स्ट्रीट मार्केट्स में और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है।

जनपथ मार्केट दिल्ली की उस जीवंत पहचान का नाम है, जहां इतिहास और आधुनिकता साथ-साथ चलते हैं। यहां खरीदारी केवल वस्तुएं खरीदना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा को करीब से महसूस करने का अवसर है। यही कारण है कि जनपथ आज भी राजधानी की शान और भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर इतवारी सेवा संस्थान का स्वास्थ्य जागरूकता एवं आयुर्वेद प्रशिक्षण शिविर, BWS ने दिया स्वस्थ जीवन का संदेश




नई दिल्ली, 28 जुलाई।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर इतवारी सेवा संस्थान द्वारा संस्था के कार्यालय 107, हरे कृष्णा कॉटेज, छतरपुर एक्सटेंशन, नई दिल्ली में स्वास्थ्य जागरूकता, उपचार एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के चित्र पर पुष्पांजलि एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना, आयुर्वेद आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देना तथा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति समाज को प्रेरित करना था।

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कार्यक्रम में मुख्य रिसोर्स पर्सन एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ शाही लाल जी ने विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रकृति ने हमें अनेक ऐसी औषधियाँ प्रदान की हैं, जिनके नियमित एवं वैज्ञानिक उपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छता, संतुलित भोजन और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण अत्यंत आवश्यक हैं।

बिहारी वेल्फेयर सोसाइटी (BWS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ परिवार से शुरू होती है। यदि प्रत्येक परिवार अपने खान-पान, स्वच्छता और दैनिक दिनचर्या पर विशेष ध्यान दे तो अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों से घर-घर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सीआईएसएफ के सहायक कमांडेंट एवं लेखक डॉ. विजय कुमार प्रसाद ने आयुर्वेद की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती बीमारियों के बीच आयुर्वेद आज भी सबसे प्रभावी और सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने दैनिक जीवन में आयुर्वेद के सिद्धांतों को अपनाएँ तो अनेक रोगों से बचाव संभव है। उन्होंने युवाओं से भारतीय चिकित्सा पद्धति को समझने और अपनाने का आग्रह किया।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इतवारी सेवा संस्थान के उद्देश्यों एवं समाजहित में किए जा रहे विभिन्न स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था निरंतर समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता को पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में समाजसेवी मनोज कुमार एवं पूजा देवी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही किसी भी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

अंत में संस्था की कोषाध्यक्ष पुष्पा लाल मीना ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतवारी सेवा संस्थान पिछले कई वर्षों से स्वास्थ्य, जनजागरूकता एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है और भविष्य में भी समाजहित के ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य जागरूक नागरिकों एवं स्थानीय लोगों ने भाग लेकर हेपेटाइटिस से बचाव, आयुर्वेदिक जीवनशैली तथा स्वास्थ्य संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

— संवाददाता: जितेंद्र कुशवाहा
सामाजिक जागरूकता टाइम्स

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

गौ सेवा ही सच्ची राष्ट्र सेवा, हर व्यक्ति को निभानी चाहिए अपनी जिम्मेदारी: अमित कुमार

                               

भाटी माइंस, नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026

संवाददाता: अशोक पंडित
सामाजिक जागरूकता टाइम्स

अपर्णा सर्व सेवा समिति के अध्यक्ष एवं समाजसेवी अमित कुमार ने कहा कि गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च स्वरूप है। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन का कुछ समय बेजुबान पशुओं, विशेषकर गौ माता की सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित करे, तो समाज में संवेदनशीलता, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को नई दिशा मिल सकती है।

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पिछले लगभग 10 वर्षों से सामाजिक जीवन में सक्रिय अमित कुमार अपनी टीम के साथ गौ सेवा, पशु संरक्षण और जनकल्याण के विभिन्न कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में लोग अक्सर अपने समय का बड़ा हिस्सा अनावश्यक कार्यों में व्यतीत कर देते हैं। यदि उसी समय का एक छोटा सा भाग भी गौ सेवा और पशु कल्याण के लिए दिया जाए, तो यह समाज और राष्ट्र दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

अमित कुमार ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धरोहर रही हैं। उनकी सेवा करना केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी भूख, पीड़ा और आवश्यकताओं को शब्दों में व्यक्त कर सकता है, लेकिन बेजुबान पशु ऐसा नहीं कर पाते। इसलिए उनकी सेवा, सुरक्षा और देखभाल करना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है
 

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इस अवसर पर समाजसेवी सुबोध पंडित ने कहा कि समाज सेवा तभी सार्थक होती है, जब उसमें मानव के साथ-साथ प्रकृति और पशुओं के प्रति भी समान संवेदनशीलता हो। उन्होंने युवाओं से गौ संरक्षण, पशु सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे जनहित के अभियानों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी यदि सेवा और करुणा की भावना को अपनाएगी, तो एक मजबूत और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव होगा।

अपर्णा सर्व सेवा समिति वर्षों से सामाजिक जागरूकता, गौ संरक्षण, पशु सेवा और जनहित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। समिति का उद्देश्य समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। संस्था समय-समय पर लोगों को पशु संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाती है।

सामाजिक जागरूकता टाइम्स ने अमित कुमार और उनकी टीम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। गौ सेवा और बेजुबान पशुओं के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले लोगों को सामाजिक सहयोग और प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है, ताकि सेवा की यह भावना अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। संस्था ने विश्वास व्यक्त किया कि अपर्णा सर्व सेवा समिति भविष्य में भी गौ सेवा, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

कुशवाहा नगर महोत्सव में महिलाओं का शानदार प्रदर्शन, गीत-नृत्य और मेहंदी प्रतियोगिताओं ने जीता दिल


संवाददाता : संजय कुमार सामाजिक जागरूकता टाइम्स 

चास (बोकारो), 27 जुलाई।प्रकाशन तिथि: 28 जुलाई 2026 (मंगलवार)
कुशवाहा नगर विकास समिति द्वारा आयोजित असाढ़ पूर्णिमा सह नगर महोत्सव के दूसरे दिन कुशवाहा भवन, चास में सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पारंपरिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे दिन आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महिला समिति की संयोजक आशा सिंहा एवं प्रमुख अतिथियों सुलाबी देवी, उषा देवी, कालावती देवी, राम सुंदरी सिंहा, मायावती, गायत्री देवी, रंजना, संगीता, यामुनी देवी तथा गीता कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ सामाजिक एकता, महिला सशक्तिकरण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत गीत प्रतियोगिता से हुई, जिसमें आकांक्षा, सरिता प्रसाद, कामिनी देवी, खुशबू कुमारी तथा इन्दु कुमारी सहित अनेक प्रतिभागियों ने अपनी मधुर एवं प्रेरणादायक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतिभागियों ने भक्ति, लोक एवं सामाजिक विषयों पर आधारित गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण वातावरण प्रदान किया।

इसके बाद आयोजित समूह नृत्य प्रतियोगिता में आकांक्षा, दिव्यांश, निकिता कुमारी सहित अन्य प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक संदेशों पर आधारित आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और सधे हुए नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रत्येक प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण मेहंदी कला प्रतियोगिता रही। इसमें पूजा कुमारी, निकिता, रश्मि रानी, एंजल सहित अन्य प्रतिभागियों ने निर्धारित समय के भीतर अपने हाथों पर बेहद सुंदर एवं आकर्षक मेहंदी डिज़ाइन उकेरे। प्रतियोगिता में पारंपरिक भारतीय कला, रचनात्मक सोच और सौंदर्यबोध का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन डिज़ाइन की मौलिकता, सफाई, कलात्मकता तथा समय-पालन के आधार पर किया।

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महोत्सव के अंतिम चरण में आयोजित व्यक्तित्व (भाषण) प्रतियोगिता में उर्मिला देवी, इन्दु कुमारी, अर्चना शान सहित प्रतिभागियों ने "असाढ़ पूर्णिमा का महत्व" विषय पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए। प्रतिभागियों ने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से इस पर्व के महत्व को सरल एवं प्रेरणादायक शब्दों में प्रस्तुत किया। उनके आत्मविश्वास और प्रभावशाली अभिव्यक्ति की उपस्थित लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति के संयोजक संजय शान, अध्यक्ष सुनील गांधी, सुनील प्रसाद, रामाश्रय प्रसाद, यशवंत सिंह, राज कुमार सिन्हा, अमरेश कुमार सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों, अतिथियों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि नगर महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और युवा प्रतिभाओं को उचित मंच प्रदान करना है। समिति ने सभी नगरवासियों से आगामी कार्यक्रमों में भी अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने तथा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने की अपील की।

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कार्यक्रम का सफल संचालन पूजा कुमारी ने किया, जबकि रीना देवी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया। महोत्सव का यह सांस्कृतिक आयोजन समाज में प्रतिभा सम्मान, सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में सराहा गया।

जनहित में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर LJP (रामविलास) चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली द्वारा चिराग पासवान को ज्ञापन सौंपा गया।

     

माननीय चिराग पासवान से मुलाकात करते हुए डॉ. विभु आनंद एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली के पदाधिकारी।

नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने माननीय केंद्रीय मंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चिराग पासवान से शिष्टाचार भेंट कर जनहित में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, संगठन को सशक्त बनाने तथा पार्टी की सेवा एवं समर्पण की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक विस्तृत ज्ञापन एवं भावी कार्ययोजना (रोडमैप) प्रस्तुत किया।

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यह प्रतिनिधिमंडल डॉ. विभु आनंद (प्रदेश अध्यक्ष, चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली) के नेतृत्व में पहुँचा। ज्ञापन में स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। इनमें दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित बस्तियों में नियमित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, मोबाइल एम्बुलेंस स्वास्थ्य सेवा की शुरुआत, पंचशील भवन में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना तथा पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के लिए LJP (R) हेल्थ कार्ड योजना प्रारंभ करने का सुझाव प्रमुख रूप से शामिल है।

चिराग पासवान को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार हेतु LJP (R) चिकित्सा प्रकोष्ठ का ज्ञापन
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 5 जुलाई 2026 को आयोजित निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर को जनता का व्यापक समर्थन मिला था। इस सफल आयोजन से प्रेरित होकर चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ ने आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक स्तर पर संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया है।

मुलाकात के दौरान डॉ. विभु आनंद ने कहा कि चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ केवल स्वास्थ्य शिविरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर उपचार एवं निःस्वार्थ सेवा पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि पार्टी की जनसेवा, सामाजिक न्याय और मानवता की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, रक्तदान शिविर, निःशुल्क चिकित्सा परामर्श, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएँ तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाएगा।

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इस अवसर पर डॉ. काशिफ अली (जोनल अध्यक्ष, चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली), शंकर खत्री (निदेशक, DOCPAT Organisation), विकास अरोड़ा (महासचिव, चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ, दिल्ली), अविक अरोड़ा (12 वर्षीय बाल लेखक एवं देश के सबसे कम उम्र के पुस्तक लेखक), राम अवतार चौपाल (संयुक्त सचिव), बसंत ठाकुर (संयुक्त सचिव) सहित चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सामाजिक सहयोगी उपस्थित रहे।

डॉ. विभु आनंद ने माननीय श्री चिराग पासवान से कहा, "हमारा संकल्प है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सेवा, समर्पण और जनकल्याण की विचारधारा को चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए। चिकित्सा प्रकोष्ठ आने वाले समय में जनसेवा के नए आयाम स्थापित करेगा।"
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय श्री चिराग पासवान के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में चिकित्सा सेवा प्रकोष्ठ की जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिलेगी तथा संगठन द्वारा संचालित स्वास्थ्य एवं सेवा अभियान समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँचेंगे। साथ ही पार्टी के सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के संदेश को और अधिक मजबूती के साथ जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया गया।

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा संपादक एवं वरिष्ठ संवाददाता सामाजिक जागरूकता टाइम्स | नई दिल्ली

सोमवार, 27 जुलाई 2026

दक्षिण दिल्ली में शासन संघमित्रा ठाणा-5 का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2026।संवाददाता:अनूप मौर्य सामाजिक जागरूकता टाइम्स परम पावन, परम पूजनीय युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की आज्ञानुवर्ती विदुषी साध्वी शासन संघमित्रा ठाणा-5 का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश सोमवार प्रातः 8:51 बजे दक्षिण दिल्ली स्थित गोयल श्रद्धा निवास, ग्रीन पार्क में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर प्रकृति ने भी मानो साध्वी संघमित्रा का स्वागत किया। सुहावने मौसम के बीच साध्वी संघमित्रा ने प्रकाश गेलड़ा के निवास C-33, ग्रीन पार्क से विहार करते हुए गोयल श्रद्धा निवास, C-14, ग्रीन पार्क में मंगल प्रवेश किया। उनके मंगल मंत्रोच्चार से संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं मंगलमय वातावरण से भर उठा।

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समारोह में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली के अध्यक्ष बिमल कुमार बेंगानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद घोड़ावत, प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री सुखराज सेठिया, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम नॉर्थ जोन के अध्यक्ष राजेश गेलड़ा, कल्याण परिषद के के.सी. जैन, गोयल परिवार के अमित गोयल, आचार्य महाप्रज्ञ अहिंसा प्रशिक्षण पुरस्कार-2011 से सम्मानित अणुव्रतसेवी संजय भाई, एनबीटी के ज्वाइंट डायरेक्टर राकेश यादव, अनूप मौर्य (HDFC), दक्षिण दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सरोज, मंत्री संगीता, करुण सेठिया, अशोक संचेती सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं समाज के वरिष्ठजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ शासन संघमित्रा के मंगल मंत्रोच्चार से हुआ। दक्षिण दिल्ली तेरापंथ महिला मंडल द्वारा भावपूर्ण मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली के सांस्कृतिक प्रभारी जय सिंह दुगड़ एवं उनकी टीम ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। तत्पश्चात दक्षिण दिल्ली सभा के पूर्व अध्यक्ष हीरालाल, वर्तमान अध्यक्ष प्रदीप खटेड़ तथा सभा के पदाधिकारियों ने भी स्वागत गीत के माध्यम से साध्वी संघमित्रा का अभिनंदन किया।

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स्वागत उद्बोधन देते हुए सभा के अध्यक्ष बिमल कुमार बेंगानी ने कहा कि संतों का सान्निध्य समाज के आध्यात्मिक जागरण, संस्कार निर्माण एवं नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम है। उन्होंने चातुर्मास को आत्मविकास और आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ अवसर बताते हुए सभी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान किया।

दक्षिण दिल्ली सभा के अध्यक्ष प्रदीप खटेड़ ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन में संयम, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है तथा समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

चातुर्मास प्रवेश समारोह में शासन साध्वी संघमित्रा का मंगल पाठ श्रवण करते अणुव्रतसेवी संजय भाई एवं अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के चीफ ट्रस्टी के.सी. जैन (IRS)।

इस अवसर पर सुखराज सेठिया, अमित गोयल, राजेश गेलड़ा, राजेश भंसाली, के.सी. जैन सहित अनेक वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए चातुर्मास के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।

अपने मंगल प्रवचन में शासन संघमित्रा ने कहा कि चातुर्मास आत्मपरिष्कार, साधना, स्वाध्याय और आध्यात्मिक उन्नयन का अनुपम अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को संयम, आत्मानुशासन, नैतिक मूल्यों और सदाचार को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सच्चा धर्म व्यक्ति के आचरण में दिखाई देता है।

यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अहिंसा, संयम, नैतिक मूल्यों, आत्मानुशासन और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम भी बना।

कार्यक्रम का सफल संचालन जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद घोड़ावत ने किया। अंत में दक्षिण दिल्ली सभा के मंत्री अशोक कोठारी ने सभी संतों, अतिथियों, पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

चातुर्मास के शुभारंभ पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने शासन संघमित्रा के पावन सान्निध्य को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए धर्म, साधना और संस्कारों के इस महापर्व में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।

साभार:
प्रदीप खटेड़
अध्यक्ष, तेरापंथ सभा दक्षिण दिल्ली

अशोक कोठारी
मंत्री, तेरापंथ सभा दक्षिण दिल्ली

प्रकृति सेवा फाउंडेशन ने कारगिल विजय दिवस पर आयोजित किया भव्य प्रतिभा उत्सव, 70 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

संवाददाताजितेंद्र कुशवाहा सामाजिक जागरूकता टाइम्स नई दिल्ली कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर प्रकृति सेवा फाउंडेशन (PSF) द्वारा जय विहार (पटना निवास के निकट), नई दिल्ली में बच्चों के लिए एक भव्य "प्रतिभा उत्सव" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर कॉलोनी एवं आसपास के क्षेत्रों से लगभग 70 प्रतिभाशाली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी कला, ज्ञान एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महंथ प्रसाद रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल भारतीय सेना की वीरता का प्रतीक नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस, त्याग और समर्पण की अमर गाथा है। उन्होंने बच्चों से देश के आदर्श, जिम्मेदार एवं संस्कारित नागरिक बनने का आह्वान करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के दौरान प्रकृति सेवा फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का अर्जुन का पौधा भेंट कर सम्मान किया तथा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत का संदेश दिया। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा, कोषाध्यक्ष विनोद गोला, महासचिव गुलशन कुमार, सचिव जितेंद्र गुप्ता, मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार, सांस्कृतिक सचिव संतोष जायसवाल तथा कार्यकारिणी सदस्य प्रेम कुंद्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की सफलता में संस्था के युवा कार्यकर्ता आरव मौर्य ने समर्पण भाव से श्रमदान कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सेवा भाव एवं सक्रिय योगदान की उपस्थित सभी लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, अभिभावकों एवं कॉलोनीवासियों ने भी सहभागिता निभाई, जिससे आयोजन अत्यंत सफल, अनुशासित एवं प्रेरणादायक रहा।

समापन अवसर पर प्रकृति सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने सभी अतिथियों, बच्चों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता तथा मानवीय मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने आगामी 80वें स्वतंत्रता दिवस के भव्य आयोजन में अधिक से अधिक नागरिकों एवं युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

प्रकृति सेवा फाउंडेशन ने यह भी संकल्प दोहराया कि भविष्य में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, रक्तदान, अंगदान एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जनसेवा की भावना को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

रुपया: साधन है, साध्य नहीं | धन का सही उपयोग क्यों जरूरी है?

 

लेखक : जितेंद्र कुशवाहा
समाजसेवी, लेखक एवं संपादक, सामाजिक जागरूकता टाइम्स

भारत की संस्कृति में धन को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखा गया है। माँ लक्ष्मी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है, किंतु हमारे ऋषि-मुनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि धन तभी कल्याणकारी है, जब उसका अर्जन ईमानदारी से हो और उसका उपयोग समाज के हित में किया जाए। आज के दौर में रुपया केवल लेन-देन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास और नागरिकों के जीवन स्तर का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसलिए रुपये के महत्व को समझने के साथ-साथ उसके सही उपयोग की भावना विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।

आज मानव जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जहाँ रुपये की आवश्यकता न पड़ती हो। भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, परिवहन और संचार—हर आवश्यकता किसी न किसी रूप में रुपये से जुड़ी हुई है। एक किसान की मेहनत का मूल्य भी रुपया है, एक मजदूर के श्रम का सम्मान भी रुपया है और एक कर्मचारी की मासिक आय भी रुपया ही है। यही रुपया व्यापार को गति देता है, उद्योगों को विकसित करता है और देश की आर्थिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाता है।

सामाजिक संगठनों की एकजुटता से होगा सशक्त समाज और विकसित भारत का निर्माण

भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेजी से डिजिटल स्वरूप की ओर बढ़ी है। यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट और डिजिटल भुगतान प्रणाली ने रुपये के उपयोग को सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है। आज गाँव का दुकानदार भी क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार कर रहा है। यह परिवर्तन केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।

लेकिन रुपये का दूसरा पक्ष भी उतना ही गंभीर है। जब धन साधन से बढ़कर जीवन का उद्देश्य बन जाता है, तब समाज में अनेक समस्याएँ जन्म लेने लगती हैं। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, कर चोरी, आर्थिक अपराध, लालच और अनैतिक प्रतिस्पर्धा का मूल कारण अक्सर धन के प्रति असंतुलित दृष्टिकोण होता है। परिवारों में संपत्ति के विवाद, रिश्तों में दूरियाँ और सामाजिक असमानता भी कहीं न कहीं धन के दुरुपयोग से जुड़ी हुई हैं। इसलिए दोष रुपये का नहीं, बल्कि उसके प्रति हमारी सोच का है।

रुपया: साधन है, साध्य नहीं – धन के सही उपयोग पर संपादकीय लेख
रुपये का सबसे श्रेष्ठ स्वरूप तब दिखाई देता है, जब वह किसी भूखे को भोजन, किसी गरीब बच्चे को शिक्षा, किसी बीमार को उपचार और किसी जरूरतमंद परिवार को सहारा प्रदान करता है। समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण के कार्यों में लगाया गया धन वास्तव में राष्ट्र निर्माण की पूँजी बन जाता है। ऐसे कार्य यह सिद्ध करते हैं कि धन का वास्तविक मूल्य उसके संग्रह में नहीं, बल्कि उसके सदुपयोग में है।

आज आर्थिक साक्षरता की भी आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय के अनुसार खर्च करना, नियमित बचत करना और भविष्य के लिए विवेकपूर्ण निवेश करना सीखना चाहिए। अनावश्यक खर्च और दिखावे की संस्कृति व्यक्ति को आर्थिक संकट में डाल सकती है, जबकि अनुशासित वित्तीय प्रबंधन परिवार और समाज दोनों को मजबूत बनाता है।

एक मजबूत राष्ट्र केवल बड़े उद्योगों या ऊँची इमारतों से नहीं बनता, बल्कि ईमानदार करदाताओं, परिश्रमी नागरिकों और जिम्मेदार समाज से बनता है। जब प्रत्येक नागरिक ईमानदारी से आय अर्जित करता है, करों का पालन करता है और अपने संसाधनों का उपयोग समाज के हित में करता है, तब देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है और लोकतंत्र भी सशक्त बनता है।

लेखक के विचार

मेरे विचार से रुपया मानव जीवन का अत्यंत आवश्यक साधन है, लेकिन इसे जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने बच्चों को केवल धन कमाना ही नहीं, बल्कि धन का सही उपयोग करना भी सिखाएँ। ईमानदारी से कमाया गया धन आत्मसम्मान देता है, जबकि अनैतिक तरीकों से अर्जित संपत्ति कभी स्थायी सुख नहीं दे सकती।

मेरा मानना है कि समाज का वास्तविक विकास तब होगा, जब हर व्यक्ति अपनी आय का एक भाग शिक्षा, समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी समर्पित करेगा। धन की सबसे बड़ी उपयोगिता दूसरों के जीवन में आशा, सम्मान और अवसर पैदा करने में है।

बिहार शरीफ, नालंदा में गूंजा ‘जहां बिहार – वहां विकास’ का संकल्प, BWS के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश

अंततः मैं यही कहना चाहूँगा कि "रुपया जेब में रहे तो जीवन को सुविधा देता है, लेकिन यदि वह दिमाग और दिल पर हावी हो जाए तो रिश्ते, संस्कार और मानवता कमजोर पड़ने लगते हैं।" इसलिए धन कमाइए, बचाइए और निवेश कीजिए, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है—ईमानदारी, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व। यही एक समृद्ध व्यक्ति, सशक्त समाज और विकसित भारत की सच्ची पहचान है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

दिल्ली में मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप ने युवाओं को सावित्रीबाई फुले डायरी से किया सम्मानित

 

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा,नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। समाज में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और महापुरुषों के आदर्शों को युवाओं तक पहुँचाने की दिशा में मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप की ओर से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय एवं जागरूक युवाओं को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारक एवं महिला शिक्षा की अग्रदूत माता सावित्रीबाई फुले की प्रेरणादायी डायरी भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर युवाओं ने समाज निर्माण, शिक्षा और सामाजिक समरसता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले का पूरा जीवन शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा, "आप अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षित कीजिए, भले ही इसके लिए आपको दो रोटी कम खानी पड़े। शिक्षा ही वह सबसे बड़ी पूंजी है, जो किसी भी व्यक्ति और समाज का भविष्य बदल सकती है।" उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि शिक्षित समाज ही जागरूक, आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र की नींव रखता है।

वक्ताओं ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में अनेक प्रकार की सामाजिक कुरीतियाँ व्याप्त थीं। उन्होंने अपने साहस, त्याग और संघर्ष के बल पर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। आज भी उनके विचार और जीवन संघर्ष प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि सम्मान का उद्देश्य केवल डायरी भेंट करना नहीं, बल्कि युवाओं में अध्ययन की आदत विकसित करना, सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना तथा महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। उनका मानना है कि जब युवा अपने जीवन में शिक्षा, समानता, सेवा और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को अपनाएंगे, तभी एक सशक्त, संगठित और जागरूक समाज का निर्माण संभव होगा।

सम्मान प्राप्त करने वाले युवाओं ने इस पहल के लिए मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले की डायरी उनके लिए केवल एक स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि जीवन में निरंतर सीखने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने और सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा है।

समाज के वरिष्ठ लोगों ने मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को महापुरुषों के विचारों और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे प्रयास नई पीढ़ी में सकारात्मक सोच, सामाजिक चेतना, नेतृत्व क्षमता और सेवा भाव का विकास करते हैं तथा शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं।

बिहार विधानसभा में डॉ. प्रेम कुमार एवं कुर्था विधायक पप्पू वर्मा ने स्कूली बच्चों से की मुलाकात

 पटना, 23 जुलाई 2026 संवाददाता: जितेंद्र कुशवाहा  बिहार विधानसभा परिसर में आज एक प्रेरणादायक एवं आत्मीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें माननीय बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, कुर्था विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक पप्पू वर्मा तथा अन्य सम्मानित विधायकगण ने विभिन्न विद्यालयों से आए स्कूली बच्चों से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर बच्चों का उत्साह, जिज्ञासा और लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी रुचि सभी के लिए प्रेरणादायक रही।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विद्यार्थियों को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक कर्तव्यों के
महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत होगी जब नई पीढ़ी संविधान के मूल्यों को समझते हुए जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनेगी।

इस अवसर पर कुर्था विधायक पप्पू वर्मा ने भी विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और सामाजिक जिम्मेदारियों की समझ भी एक अच्छे नागरिक के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को ईमानदारी, अनुशासन और समाजसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

बिहार शरीफ, नालंदा में गूंजा ‘जहां बिहार – वहां विकास’ का संकल्प, BWS के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश

विद्यार्थियों ने बिहार विधानसभा की कार्यप्रणाली को निकट से देखा और जनप्रतिनिधियों से लोकतंत्र, विधायी प्रक्रिया तथा जनसेवा से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। जनप्रतिनिधियों ने बच्चों की जिज्ञासाओं का सरल एवं प्रेरणादायक उत्तर देते हुए उन्हें देश और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों का उत्साह और सीखने की ललक यह दर्शाती है कि भारत का लोकतांत्रिक भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

अंत में सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

बुधवार, 22 जुलाई 2026

बिहार शरीफ, नालंदा में गूंजा ‘जहां बिहार – वहां विकास’ का संकल्प, BWS के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश

बिहार शरीफ (नालंदा), 22 जुलाई 2026।संवाददाता : एडवोकेट अनिल कुमार पटेल बिहार के ऐतिहासिक नगर बिहार शरीफ, नालंदा में बिहारी वेल्फेयर सोसाइटी (BWS) द्वारा सामाजिक जागरूकता एवं विकास को समर्पित एक प्रेरणादायक जनसंपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान "जहां बिहार – वहां विकास" का संदेश बुलंद करते हुए बिहारी वेल्फेयर सोसाइटी (BWS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने समाज के सभी वर्गों से शिक्षा, रोजगार, सामाजिक एकता और जनकल्याण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर गरीबों के नेता एडवोकेट अनिल कुमार पटेल, अमीन राकेश पासवान तथा स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान एक स्थानीय चाय दुकान पर आम लोगों के बीच बैठकर सामाजिक मुद्दों, विकास और जनभागीदारी पर खुलकर चर्चा की गई। इस अनौपचारिक संवाद ने यह संदेश दिया कि समाज की वास्तविक ताकत आम नागरिकों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए कार्य करने में है।

अपने संबोधन में संजय भाई ने कहा कि बिहार की पहचान केवल उसके गौरवशाली इतिहास से नहीं, बल्कि उसके मेहनतकश लोगों, युवाओं और सामाजिक चेतना से भी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सभी लोग जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर विकास के लिए एकजुट हों, तो बिहार देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक सेवा को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताया।

एडवोकेट अनिल कुमार पटेल ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सच्ची समाजसेवा है। वहीं अमीन राकेश पासवान ने युवाओं से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने "जहां बिहार – वहां विकास" के संकल्प को आगे बढ़ाने तथा समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। बिहारी वेल्फेयर सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि संगठन भविष्य में भी बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े अभियान लगातार संचालित करता रहेगा।

देश के समाजसेवी महेन्द्र प्रधान से मिले BWS अध्यक्ष संजय भाई, बिहार विकास विज़न पर हुई चर्चा

नई दिल्ली/समस्तीपुर। बिहार के समग्र विकास, सामाजिक एकता और जनकल्याण के उद्देश्य से कार्यरत बिहारी वेल्फेयर सोसायटी (BWS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भाई ने बिहार के समस्तीपुर जिले के मथुरापुर निवासी देश के प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं पशुप्रेमी श्री महेन्द्र प्रधान से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें संगठन के BWS Vision से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

बैठक के दौरान संजय भाई ने बताया कि बिहारी वेल्फेयर सोसायटी का उद्देश्य केवल एक संगठन के रूप में कार्य करना नहीं, बल्कि देश और दुनिया में रह रहे बिहारवासियों को एक साझा मंच पर जोड़कर बिहार के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक जनआंदोलन खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता तथा युवाओं को समाज निर्माण से जोड़ने जैसे विषयों पर निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने संगठन के विज़न पर प्रकाश डालते हुए बताया कि BWS बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने, बिहार की संस्कृति एवं अस्मिता के संरक्षण, छठ महापर्व को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिलाने, बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी सेवा प्रकल्प संचालित करने तथा देशभर में बिहारवासियों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है। साथ ही "जहाँ बिहार, वहाँ विकास" के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने का अभियान भी चलाया जा रहा है। यह जानकारी संगठन के विज़न दस्तावेज़ में उल्लिखित उद्देश्यों के अनुरूप साझा की गई।

समाजसेवी एवं पशुप्रेमी श्री महेन्द्र प्रधान ने बिहारी वेल्फेयर सोसायटी की कार्यशैली एवं दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राज्य के विकास के लिए ऐसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक जागरूकता, सेवा और जनभागीदारी के माध्यम से ही एक मजबूत एवं विकसित समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने भविष्य में संगठन के जनहित एवं समाज सेवा से जुड़े अभियानों में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

इस अवसर पर बिहारी वेल्फेयर सोसायटी (BWS) के जनसंपर्क पदाधिकारी (PRO) जितेन्द्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना तथा बिहारवासियों के बीच सामाजिक एकता, सहयोग और सकारात्मक सोच को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि BWS का संकल्प है कि देश के प्रत्येक कोने में रहने वाले बिहारवासियों को एकजुट कर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में ठोस पहल की जाए।

बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई तथा दोनों समाजसेवियों ने समाजहित में मिलकर कार्य करने, जनजागरण अभियान को मजबूत बनाने और बिहार के विकास के लिए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की।

बिहारी वेल्फेयर सोसायटी (BWS) का मूल मंत्र है— "जहाँ बिहार, वहाँ विकास।"

प्रकाशन तिथि: 22 जुलाई 2026
स्थान: नई दिल्ली / समस्तीपुर, बिहार
संवाददाता: अमित कुमार

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