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सोमवार, 3 अगस्त 2026

सभी नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत हैं माता सावित्रीबाई फुले : सविता सिंह कुशवाहा

 सविता सिंह कुशवाहा, उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन नई दिल्ली  भारत की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति के इतिहास में यदि किसी महान महिला का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है, तो वह हैं माता सावित्रीबाई फुले। उन्होंने उस समय महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ी, जब समाज में बेटियों को शिक्षा देना पाप समझा जाता था। आज देश की करोड़ों बेटियाँ विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रही हैं, प्रशासनिक सेवाओं से लेकर सेना, विज्ञान, न्यायपालिका, चिकित्सा, राजनीति और उद्योग जगत तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। यह परिवर्तन किसी एक दिन में नहीं आया, बल्कि इसके पीछे माता सावित्रीबाई फुले के संघर्ष, त्याग और दूरदर्शिता की अमिट छाप है।संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन की उपाध्यक्ष सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज यदि समाज में महिलाओं को सम्मान मिल रहा है, बेटियाँ शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय माता सावित्रीबाई फुले को दिया जाना चाहिए। उन्होंने न केवल शिक्षा का दीप जलाया बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, समानता और सामाजिक न्याय की ऐसी नींव रखी, जिस पर आधुनिक भारत का निर्माण हुआ।

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उन्होंने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत थीं। उन्होंने समाज की उन कुरीतियों को चुनौती दी, जो महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखना चाहती थीं। जब लोग बेटियों को विद्यालय भेजने के विरोध में थे, तब उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय प्रारम्भ किया। यह केवल एक विद्यालय नहीं था, बल्कि महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की शुरुआत थी।

सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब सावित्रीबाई फुले पढ़ाने जाती थीं, तब कट्टरपंथी लोग उन पर पत्थर, कीचड़ और गोबर तक फेंकते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे अपने साथ एक अतिरिक्त साड़ी लेकर निकलती थीं ताकि विद्यालय पहुँचकर गंदी हुई साड़ी बदल सकें और पूरे आत्मविश्वास के साथ छात्राओं को शिक्षा दे सकें। यह घटना हमें सिखाती है कि समाज परिवर्तन का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आज जब देश की बेटियाँ डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर, न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, खिलाड़ी, पत्रकार और जनप्रतिनिधि बन रही हैं, तब हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस परिवर्तन की शुरुआत सावित्रीबाई फुले ने ही की थी। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि यदि एक बेटी शिक्षित होती है, तो पूरा परिवार शिक्षित होता है और जब परिवार शिक्षित होगा, तभी राष्ट्र प्रगति करेगा।

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सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों में बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव, महिला हिंसा और शिक्षा से वंचित रहने जैसी समस्याएँ मौजूद हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से संभव है। माता सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि समाज में समान अवसर और समान सम्मान तभी मिलेगा, जब हर बेटी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि हमें केवल सावित्रीबाई फुले की जयंती या पुण्यतिथि पर उन्हें याद नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। प्रत्येक परिवार का यह संकल्प होना चाहिए कि वह अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाएगा, उसके सपनों का सम्मान करेगा और उसे आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सविता सिंह कुशवाहा ने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भागीदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें नेतृत्व, प्रशासन, सामाजिक सेवा, राजनीति, विज्ञान, उद्यमिता और निर्णय लेने की प्रत्येक प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए। जब महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिलेगा, तभी भारत वास्तव में विकसित और समतामूलक राष्ट्र बन सकेगा।

उन्होंने कहा कि आज देश की नई शिक्षा नीति भी बेटियों की शिक्षा पर विशेष बल देती है। सरकार की विभिन्न योजनाएँ—जैसे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', छात्रवृत्ति योजनाएँ तथा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम—तभी सफल होंगे जब समाज स्वयं अपनी सोच बदलेगा। समाज की मानसिकता में परिवर्तन लाने के लिए माता सावित्रीबाई फुले के विचार आज पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।

"आज जिस बेटी को शिक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, उसका सबसे बड़ा श्रेय माता सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और सामाजिक क्रांति को जाता है। हमें उनके विचारों को घर-घर तक पहुँचाना होगा।"
                                                                         सविता सिंह कुशवाहा
                                                    उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन

उन्होंने कहा कि संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन निरंतर महिलाओं और बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन तथा सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य कर रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और आत्मविश्वासी बनाना है। संस्था समय-समय पर महिला जागरूकता अभियान, शिक्षा सहायता, कौशल विकास, स्वास्थ्य शिविर तथा सामाजिक चेतना कार्यक्रम आयोजित करती है, ताकि समाज में समानता और सम्मान की भावना मजबूत हो।

सविता सिंह कुशवाहा ने युवाओं से भी विशेष अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में शिक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता का संदेश फैलाने का माध्यम बनाएं। यदि युवा पीढ़ी सावित्रीबाई फुले के विचारों को अपनाती है, तो आने वाला भारत और अधिक शिक्षित, जागरूक तथा समानता पर आधारित होगा।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम हर बेटी को यह विश्वास दिलाएँ कि वह किसी से कम नहीं है। उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार है और समाज का दायित्व है कि वह उसके मार्ग की बाधाएँ दूर करे। जब प्रत्येक बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर होगी, तभी भारत विश्व में वास्तविक अर्थों में एक विकसित और सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

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अंत में सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले का जीवन केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने संघर्ष से यह सिद्ध किया कि शिक्षा सबसे बड़ी शक्ति है और ज्ञान से ही सामाजिक परिवर्तन संभव है। आज हम जिस आधुनिक भारत का सपना देखते हैं, उसकी मजबूत नींव सावित्रीबाई फुले जैसे महान समाज सुधारकों ने रखी है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाए और शिक्षा, समानता तथा महिला सम्मान के उनके मिशन को आगे बढ़ाए।

माता सावित्रीबाई फुले का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—"शिक्षित बनो, जागरूक बनो और समाज को समानता की राह पर आगे बढ़ाओ।" यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

रिपोर्ट : जितेन्द्र कुशवाहा
संपादक, सामाजिक जागरूकता टाइम्स


देश के युवा नशा मुक्त भारत बनाने को तैयार: संजय भाई ने की शराबबंदी की मांग

नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026।

नशा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रख्यात राष्ट्रीय विचारक एवं चिंतक संजय भाई ने कहा कि देश का युवा वर्ग अब "नशा मुक्त भारत" के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा, स्वस्थ वातावरण और सरकार का सहयोग मिले तो भारत को नशामुक्त बनाने का सपना शीघ्र साकार किया जा सकता है।

संजय भाई ने कहा कि वे लंबे समय से भारत सरकार से देशव्यापी नशामुक्ति अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने तथा शराबबंदी की दिशा में ठोस एवं निर्णायक कदम उठाने की मांग करते रहे हैं। उनका मानना है कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि परिवारों, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी गंभीर बाधा बन रही है।

उन्होंने कहा कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों के कारण देश में सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हिंसा, अपराध, स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों तथा सामाजिक असुरक्षा की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार को स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और सामाजिक कल्याण पर भारी आर्थिक व्यय करना पड़ता है। यदि नशे पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए तो यह धन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और युवाओं के विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाया जा सकता है।

संजय भाई ने केंद्र सरकार एवं दिल्ली सरकार से अपील करते हुए कहा कि देश के युवाओं के स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि पवित्र सावन माह के अवसर पर सरकार यदि नशामुक्ति और शराबबंदी को लेकर प्रभावी कदम उठाए तो यह देशवासियों के लिए एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक उपहार होगा।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज, परिवार, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। प्रत्येक नागरिक को अपने आसपास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना चाहिए तथा नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

संजय भाई ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे नशा मुक्ति आंदोलन को जन-जन का अभियान बनाएं और इसे घर-घर की आवाज़ बनाकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि नशे से दूर रहेगा तो वही कल एक सशक्त राष्ट्र का निर्माता बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग, सामाजिक जागरूकता और सरकार की इच्छाशक्ति से भारत निश्चित रूप से नशा मुक्त राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

लेखक/रिपोर्टर:
जितेन्द्र कुशवाहा
संपादक, सामाजिक जागरूकता टाइम्स

कानपुर में अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा की बैठक, समाजोत्थान के 13 प्रस्ताव पारित

कानपुर। अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक एवं खुला सत्र सह आमसभा 25–26 जुलाई को कानपुर के लाजपत भवन सभागार में संपन्न हुई। बैठक में समाज को शिक्षित, सशक्त और समृद्ध बनाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा पंचायत से संसद तक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत करने सहित 13 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद उन्हें लागू करने का निर्णय लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश महतो ने की। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेशाध्यक्ष तथा महासभा के विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय कार्यसमिति ने भाजपा विधायक आशा मौर्य को महिलाओं के सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता से जुड़े राष्ट्रीय अभियान का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के नाम का अनुचित उपयोग करने वाले तथाकथित व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सर्वसम्मति से अगली राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।

कानपुर से लौटने के बाद जारी लिखित बयान में राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश महतो ने कहा कि समाज को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, संगठन और राजनीतिक सहभागिता को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने चक्रवर्ती सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य और तथागत गौतम बुद्ध के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के पूर्वजों ने अखंड भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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उन्होंने कहा कि समाज को अपने सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संगठित रहना होगा। यदि समाज के किसी व्यक्ति के साथ अन्याय या उत्पीड़न होता है तो संगठन उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

26 जुलाई को लाजपत भवन सभागार में आयोजित आमसभा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश अध्यक्ष दिनेश सिंह कुशवाहा ने की। मुख्य अतिथि राकेश महतो ने युवाओं और महिलाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए जागरूक एवं संगठित रहना होगा। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने सामाजिक जागरूकता पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं।

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भिखारी ठाकुर की 55वीं पुण्यतिथि: आज के युवाओं के लिए प्रेरणा | जितेंद्र कुशवाहा

 

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा से पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रमुख उपस्थित लोगों में योगेश मौर्य, सीमा समृद्धि कुशवाहा, भारत सिंह कुशवाहा, आशा मौर्य, सुलोचना कुशवाहा, विनोद कुशवंशी, लोकमान कुशवाहा, सचिन वर्मा, बसावन भगत, राम आसरे कुशवाहा, राम सेवक कुशवाहा, जय प्रकाश कुशवाहा, पंकज कुशवाहा, राधा शाक्य, सर्वेश कुशवाहा, तोता राम महाजन, अभय कुशवाहा, धीरज सिंह कुशवाहा, गंगासागर कुशवाहा, गजानन सैनी, डॉ. सौरभ सुमन, ललिता कुशवाहा, अंजय मेहता, प्रेम मौर्य, शिव शरण कुशवाहा, अशोक कुशवाहा, हरिशंकर कुशवाहा, उमेश कुशवाहा, आलोक कुशवाहा, हरदयाल कुशवाहा, मनोज कुशवाहा "मधुर", गायत्री कश्यप, रूबी कुशवाहा, लक्ष्मण कुशवाहा, कुंवर आलोक कुशवाहा, ओमप्रकाश कुशवाहा, रेणु कुमारी, गोपाल सिंह कुशवाहा तथा धर्मेंद्र कुशवाहा शामिल रहे।

दो दिवसीय कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रदेश महामंत्री विजय कुमार कुशवाहा, उमेश सिंह कुशवाहा तथा जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में कपिल कुशवाहा, कन्हैया लाल कुशवाहा, हेमलता कुशवाहा, प्रतिमा कुशवाहा, महेश कुशवाहा, लखन लाल कुशवाहा, एडवोकेट पी.पी. कुशवाहा, चंदन कुशवाहा, कैलाश कुशवाहा, विशाल कुशवाहा, हरिश्चंद्र कुशवाहा, रामप्रसाद कुशवाहा, राकेश कुशवाहा, मनीष कुशवाहा, शिशुपाल कुशवाहा, भगवान दास कुशवाहा, शिवम कुशवाहा, बलराम कुशवाहा, हरचरण कुशवाहा, जी.एस. कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने योगदान दिया।

प्रकाशन तिथि: 03 अगस्त 2026

रिपोर्ट: अनुज मौर्य

संपादक: जितेन्द्र कुशवाहा

सभी नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत हैं माता सावित्रीबाई फुले : सविता सिंह कुशवाहा

  सविता सिंह कुशवाहा, उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन   नई दिल्ली  भारत की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति के इतिहास में यदि किसी महा...

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