सोमवार, 31 अगस्त 2026

मेहनौन विधानसभा में अपना जनता पार्टी की कार्यकर्ता बैठक सम्पन्न, सैकड़ों कार्यकर्ता रहे मौजूद

                       

गोण्डा, 30 अगस्त 2026। मेहनौन विधानसभा क्षेत्र में अपना जनता पार्टी की कार्यकर्ता बैठक रविवार को विधानसभा प्रभारी केडी मौर्य के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने तथा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीराम मौर्य, प्रदेश प्रवक्ता एवं देवीपाटन मंडल प्रभारी रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में देवीपाटन मंडल अध्यक्ष सियाराम जी उपस्थित रहे। बैठक में लोक गायक अनमोल वर्मा, उतरौला रसोई के संस्थापक घनश्याम वर्मा, गोण्डा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र मौर्य, किसान कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ मौर्य, किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष अजय जी, बलरामपुर जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश बुंदेला सहित अनेक पदाधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बैठक के दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने तथा आम जनता के बीच सक्रिय रूप से कार्य करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन की मजबूती उसके कार्यकर्ताओं की सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण पर निर्भर करती है। कार्यकर्ताओं से क्षेत्र की जनता की समस्याओं को समझने तथा उन्हें उचित मंच तक पहुंचाने की दिशा में निरंतर कार्य करने की अपील की गई।

कार्यक्रम में गोण्डा जिला उपाध्यक्ष गोलू मौर्य, महेश शर्मा, जिला महासचिव अशोक चौधरी, ओमप्रकाश वर्मा प्रधान, दयाराम यादव, वंशीधर यादव, शिव शरण मौर्य, गुड्डू मौर्य, सज्जाक अली, अतीउल्ला, वाजिद अली, विजय यादव, शिवराज वर्मा, राम समुझ यादव, राम सामोखन यादव, जगदीश गौतम पूर्व प्रधान, ओमप्रकाश सोनकर, राम कृपाल वर्मा और देवीप्रसाद कोरी समेत अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बैठक में विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर अपने विचार भी साझा किए। पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को आगामी कार्यक्रमों एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बैठक में मेहनौन विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। आयोजकों ने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्टर — अनित मौर्य, गोण्डा

छतरपुर में बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा का हुआ भव्य अनावरण

विधायक करतार सिंह तंवर एवं निगम पार्षद पिंकी नरेश त्यागी ने किया प्रतिमा का अनावरण, बड़ी संख्या में पहुंचे क्षेत्रवासी
नई दिल्ली। छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के छतरपुर वार्ड अंतर्गत डॉ. अंबेडकर कॉलोनी, शिवानी स्कूल के निकट मुख्य द्वार पर भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भव्य प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया। प्रतिमा का अनावरण छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक करतार सिंह तंवर एवं छतरपुर वार्ड की निगम पार्षद पिंकी नरेश त्यागी द्वारा किया गया। प्रतिमा के अनावरण को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह और खुशी देखने को मिली।

कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी, कॉलोनीवासी एवं स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में जितेंद्र कुशवाहा भी विशेष रूप से शामिल हुए और उन्होंने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि डॉ. अंबेडकर कॉलोनी के मुख्य द्वार पर बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कॉलोनीवासी इस मांग को लेकर लगातार प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे थे। क्षेत्रवासियों के निरंतर प्रयास और जनप्रतिनिधियों के सहयोग के बाद आखिरकार यह मांग पूरी हुई और मुख्य द्वार पर बाबा साहब की विशाल प्रतिमा स्थापित कर उसका अनावरण किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन सामाजिक समानता, शिक्षा, न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित किया। भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहब का योगदान ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय है। उनकी प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि समाज में समानता, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश देती रहेगी।

बताया गया कि छतरपुर वार्ड में इससे पहले 60 फुटा रोड पर भी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया जा चुका है। अब डॉ. अंबेडकर कॉलोनी के मुख्य द्वार पर दूसरी प्रतिमा स्थापित होने से क्षेत्रवासियों में विशेष खुशी है। लोगों ने कहा कि मुख्य द्वार पर बाबा साहब की प्रतिमा आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उनके विचारों और संघर्षों की याद दिलाएगी।

कार्यक्रम के दौरान सांसद के अथक प्रयासों तथा क्षेत्रीय विधायक करतार सिंह तंवर एवं निगम पार्षद पिंकी नरेश त्यागी के सहयोग की भी सराहना की गई। स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

आजादी के 80वें वर्ष में बेघर परिवारों का सवाल | जितेंद्र कुशवाहा

प्रतिमा स्थापना एवं कार्यक्रम में विशेष सहयोगकर्ता अजय माथुर एवं हरीश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समस्त कॉलोनीवासियों एवं आरडब्ल्यूए की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं सहयोगकर्ताओं का विशेष आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर लोगों ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बताए मार्ग पर चलने, शिक्षा को बढ़ावा देने तथा समाज में समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया। प्रतिमा के अनावरण के बाद क्षेत्र में उत्सव और खुशी का माहौल रहा।

रिपोर्टर: जितेंद्र कुशवाहा
सामाजिक जागरूकता टाइम्स



गुरुवार, 27 अगस्त 2026

शोभा रावत को मिला Achievement Award 2026, LIC ने किया सम्मानित

 

रिपोर्टर | जितेंद्र कुशवाहा प्रकाशन तिथि: 27 अगस्त 2026 स्थान: नई दिल्ली  LIC Branch 11K, करोल बाग, नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में शोभा रावत को उनके उत्कृष्ट कार्य एवं उपलब्धियों के लिए Achievement Award 2026 की ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद परिवार, मित्रों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों ने WhatsApp और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई एवं शुभकामना संदेश दिए।

शोभा रावत अपने कार्य के प्रति काफी जागरूक, जिम्मेदार और समर्पित मानी जाती हैं। वह पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उनके कार्य के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की उपस्थित लोगों ने सराहना की।

इस अवसर पर जितेंद्र कुशवाहा, महेश रावत, ललित सिंह अधिकारी, रमेश कुमार सहित अन्य लोगों ने शोभा रावत को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी इसी तरह बेहतर कार्य करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

       आजादी के 80वें वर्ष में बेघर परिवारों का सवाल | जितेंद्र कुशवाहा

सम्मान प्राप्त करने के बाद शोभा रावत ने कहा, “यह Award मिलने से मेरी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। यह सम्मान मुझे आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा। मैं अपने कार्य के प्रति पहले से अधिक जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करूंगी।”

उन्होंने सम्मान के लिए LIC के अधिकारियों तथा अपने सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी उपलब्धि के पीछे परिवार और सहयोगियों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है।

सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि परिवार और कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक जीवन में सकारात्मक योगदान देना प्रेरणादायक है। शोभा रावत की यह उपलब्धि अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश देती है।

Achievement Award 2026 की ट्रॉफी शोभा रावत के लिए गौरव के साथ नई जिम्मेदारी का प्रतीक बनी है। सम्मान के बाद उन्हें लगातार मिल रहे बधाई संदेशों से उनके शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।

आजादी के 80वें वर्ष में बेघर परिवारों का सवाल | जितेंद्र कुशवाहा

 

प्रकाशन तिथि: 27 अगस्त 2026
लेखक: जितेंद्र कुशवाहा
सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक

नई दिल्ली। देश आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। भारत आज विकास, प्रगति, आत्मनिर्भरता, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का संकल्प लेकर चल रहा है। देश ने पिछले दशकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, सड़क, बिजली, डिजिटल सेवाओं और आवास के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकारों की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों में आज भी ऐसे परिवार मौजूद हैं, जिनके पास रहने के लिए अपना पक्का और सुरक्षित मकान नहीं है।

यह स्थिति एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—जब देश आजादी के 80वें वर्ष का गौरव मना रहा है, तब भी अनेक गरीब परिवार सुरक्षित छत के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं?

आजादी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का नाम नहीं है। आजादी का वास्तविक अर्थ तब पूरा होता है, जब देश का प्रत्येक नागरिक सम्मान, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के साथ जीवन जी सके। किसी गरीब परिवार के लिए अपना घर केवल चार दीवारों और छत का नाम नहीं है। मकान उसके बच्चों की सुरक्षा, परिवार की गरिमा और भविष्य की उम्मीद से जुड़ा होता है। जिस परिवार के पास रहने के लिए स्थायी घर नहीं होता, उसके सामने हर मौसम एक नई चुनौती लेकर आता है।

बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने का डर, गर्मी में तपती झोपड़ी, सर्दी में ठंडी हवाओं से बचने की चिंता और कभी भी उजड़ जाने की आशंका—ये समस्याएं उन परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और महिलाओं, बुजुर्गों तथा बीमार लोगों को भी असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि देश की प्रगति का मूल्यांकन केवल बड़ी परियोजनाओं, ऊंची इमारतों और आर्थिक आंकड़ों से नहीं किया जाना चाहिए। विकास की असली कसौटी यह होनी चाहिए कि समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी गरीब परिवार के पास आज भी रहने के लिए सुरक्षित छत नहीं है, तो यह केवल उस परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए और किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को केवल जानकारी या दस्तावेजों के अभाव में उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े।

योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचे

देश में गरीबों के लिए आवास से जुड़ी कई सरकारी योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना है। लेकिन किसी भी योजना की सफलता तभी मानी जा सकती है, जब उसका लाभ वास्तव में उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसके लिए योजना बनाई गई है।

कई बार गरीब परिवारों को योजनाओं की जानकारी नहीं होती। कुछ लोग आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों या सरकारी कार्यालयों की प्रक्रिया को समझ नहीं पाते। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऐसे भी परिवार हो सकते हैं, जो लंबे समय से अस्थायी आवास में रह रहे हैं, लेकिन किसी कारण से उनका सर्वे या चिन्हांकन नहीं हो पाया है।

ऐसे मामलों में प्रशासन को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जरूरतमंद परिवारों का पारदर्शी सर्वे किया जाना चाहिए। पात्रता की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और जिन परिवारों को आवास की आवश्यकता है, उन्हें योजना से जोड़ने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

जितेंद्र कुशवाहा ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि झुग्गियों, अस्थायी झोपड़ियों और असुरक्षित स्थानों पर रहने वाले परिवारों की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना का उद्देश्य तभी सफल होता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

आंकड़ों से आगे जमीनी हकीकत जरूरी

आज के समय में विकास की चर्चा अक्सर आंकड़ों के माध्यम से होती है। कितने मकान बने, कितनी सड़कें बनीं, कितने परिवारों को योजनाओं का लाभ मिला—इन सभी आंकड़ों का अपना महत्व है। लेकिन आंकड़ों के साथ जमीनी हकीकत को समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक तरफ यदि कोई परिवार पक्के मकान में सुरक्षित जीवन जी रहा है और दूसरी तरफ उसी शहर या गांव में कोई परिवार प्लास्टिक, टीन या अस्थायी सामग्री से बनी झोपड़ी में जीवन गुजार रहा है, तो विकास की तस्वीर अधूरी दिखाई देती है।

जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास केवल सरकारी सहायता नहीं है। यह सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। एक स्थायी घर मिलने के बाद परिवार के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिलता है, परिवार को मौसम की मार से सुरक्षा मिलती है और लोगों के जीवन में स्थिरता आती है।

इसीलिए आवास के सवाल को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन के सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए।

गरीब परिवारों की पहचान हो

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सबसे पहले उन परिवारों की पहचान की जानी चाहिए, जिनके पास अपना मकान नहीं है या जो अत्यंत असुरक्षित आवास में रह रहे हैं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय, ग्राम पंचायत और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद परिवारों की पहचान के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। वास्तविक पात्र परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और किसी भी प्रकार की भेदभावपूर्ण व्यवस्था को स्थान नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि समाजसेवी संस्थाएं और स्थानीय नागरिक भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी क्षेत्र में कोई परिवार लंबे समय से बेघर है या अस्थायी आवास में जीवन गुजार रहा है, तो उसकी समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने और उसे उपलब्ध योजनाओं की जानकारी देने में सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मकान

किसी परिवार का घर केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से भी जुड़ा होता है। जिस बच्चे को हर समय यह चिंता हो कि बारिश में घर सुरक्षित रहेगा या नहीं, वह पढ़ाई पर कितना ध्यान दे पाएगा? जिस परिवार को बार-बार अपना ठिकाना बदलना पड़ता है, उसके बच्चों की शिक्षा कितनी स्थिर रह पाएगी?

इसलिए गरीब परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का अर्थ केवल उन्हें मकान देना नहीं है। इसका अर्थ है—बच्चों को स्थिर वातावरण देना, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षा देना और परिवार को भविष्य के लिए एक आधार उपलब्ध कराना।

यदि देश को वास्तव में विकसित और मजबूत बनाना है, तो विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना जरूरी है।


“अपनी जमीन, अपना मकान” बने हर जरूरतमंद का सपना

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा, “अपनी जमीन, अपना मकान—चाहे इसमें कुछ वर्ष लगें, लेकिन हर जरूरतमंद परिवार के पास अपना सुरक्षित घर होना चाहिए। यह केवल एक परिवार का सपना नहीं, बल्कि एक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी समाज का लक्ष्य होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को केवल सहायता पाने वाला वर्ग मानने के बजाय उन्हें सम्मान और अधिकार के साथ देखने की आवश्यकता है। एक परिवार जब अपने घर का निर्माण करता है, तो उसके साथ उसकी उम्मीदें, बच्चों का भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा भी जुड़ती है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। लोगों को यह पता होना चाहिए कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन सी योजनाएं उपलब्ध हैं और पात्र परिवार उनका लाभ किस प्रकार ले सकते हैं।

सवाल केवल सरकार से नहीं, समाज से भी

बेघर परिवारों का सवाल केवल सरकार और प्रशासन का विषय नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी भी है। समाज के सक्षम लोगों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों को ऐसे परिवारों की समस्याओं को सामने लाने में सहयोग करना चाहिए।

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यदि किसी गरीब परिवार के पास जमीन है लेकिन मकान बनाने के लिए संसाधन नहीं हैं, तो उसकी समस्या अलग है। यदि किसी परिवार के पास जमीन भी नहीं है और रहने का स्थायी स्थान भी नहीं है, तो उसके लिए अलग प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए हर परिवार की वास्तविक स्थिति को समझकर समाधान की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार को केवल इसलिए पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि वह अपनी समस्या स्वयं सरकारी कार्यालय तक पहुंचाने में सक्षम नहीं है। प्रशासनिक व्यवस्था को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना होगा।

आजादी का अमृत तभी सार्थक होगा

भारत ने आजादी के बाद लंबी विकास यात्रा तय की है। देश ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, उद्योग और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लेकिन विकास की यह यात्रा तभी पूर्ण मानी जाएगी, जब समाज का सबसे कमजोर व्यक्ति भी इसके लाभ से जुड़ सके।

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा, “आजादी का उत्सव तभी सार्थक होगा, जब हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर सुरक्षित छत होगी। हमें केवल आजादी के वर्षों की गिनती नहीं करनी है, बल्कि यह भी देखना है कि इन वर्षों में समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन में कितना बदलाव आया है।”

उनका कहना है कि देश के 80वें स्वतंत्रता वर्ष को केवल समारोहों और आयोजनों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे सामाजिक संकल्प का वर्ष भी बनाया जा सकता है। सरकारें अपनी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करें, प्रशासन जरूरतमंदों की पहचान करे और समाज ऐसे परिवारों के साथ खड़ा हो—तो सामूहिक प्रयास से बड़ा बदलाव संभव है।

आज जरूरत इस बात की है कि हम विकास को केवल शहरों की चमक और बड़ी परियोजनाओं से न देखें, बल्कि उस परिवार की आंखों से भी देखें जिसके पास अभी तक अपना घर नहीं है। उसके लिए पक्का मकान केवल एक सपना नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा की बुनियादी जरूरत है।

जब देश आजादी के 80वें वर्ष का गौरव मना रहा है, तब हमें यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि विकास की यात्रा में कोई भी जरूरतमंद परिवार पीछे न छूटे। हर पात्र परिवार तक आवास योजनाओं का लाभ पहुंचे, हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिले और हर परिवार के पास सम्मान के साथ रहने के लिए अपनी सुरक्षित छत हो।

यही आजादी की भावना को मजबूत करेगा और यही सच्चे अर्थों में जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

“अपनी जमीन, अपना मकान—चाहे लगे कुछ साल, लेकिन हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर हो अपनी सुरक्षित छत।”

बुधवार, 26 अगस्त 2026

भाटी माइंस में लक्ष्मी योजना के निःशुल्क फॉर्म भरने हेतु शिविर

नई दिल्ली। अपर्णा सर्व सेवा समिति द्वारा भाटी माइंस स्थित बाबा रामदेव मंदिर में आज निःशुल्क लक्ष्मी योजना के फॉर्म भरने हेतु विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराना तथा पात्र लाभार्थियों को आवेदन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करना रहा।

शिविर में भाटी माइंस एवं आसपास के क्षेत्र के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बड़ी संख्या में लोगों ने शिविर में पहुंचकर योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त की और अपने फॉर्म भरवाए। समिति के सदस्यों ने सेवा भाव के साथ लोगों को आवेदन प्रक्रिया समझाई तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराते हुए फॉर्म भरने में सहयोग किया।

छठ महापर्व की पांच मांगों को लेकर DM-ADM से मिला छठ महापर्व समन्वय मंच

इस अवसर पर अपर्णा सर्व सेवा समिति के अध्यक्ष अमित ने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करना समिति की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में इस प्रकार के सहायता शिविर लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित होते हैं।

अमित ने कहा कि समिति का प्रयास है कि क्षेत्र के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं की सही जानकारी मिले और आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने शिविर में सहयोग करने वाले सभी सदस्यों और स्थानीय लोगों का आभार व्यक्त किया।

शिविर में समिति के सदस्यों ने पूरी जिम्मेदारी एवं सेवा भावना के साथ लोगों की सहायता की। लोगों को आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। शिविर में पहुंचे लाभार्थियों ने समिति के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से उन्हें सरकारी योजनाओं तक पहुंच बनाने में काफी सुविधा मिलती है।

अपर्णा सर्व सेवा समिति का कहना है कि जनसेवा केवल किसी एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति निरंतर जिम्मेदारी है। इसी भावना के साथ समिति भविष्य में भी जरूरतमंद लोगों की सहायता, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता और जनहित से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

डॉ. लाजपत राय मेहरा के 94वें जन्मदिन पर राष्ट्रीय न्यूरोथेरेपी संगोष्ठी

शिविर के दौरान लोगों का उत्साह और सहयोग देखने को मिला। समिति के सदस्यों ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “सेवा ही संकल्प, सेवा ही उद्देश्य और जनसेवा ही सच्ची सेवा है।”

रिपोर्ट: जितेन्द्र कुशवाहा
प्रकाशन दिनांक: 26 अगस्त 2026

डॉ. लाजपत राय मेहरा के 94वें जन्मदिन पर राष्ट्रीय न्यूरोथेरेपी संगोष्ठी

प्रकाशन दिनांक: 26 अगस्त 2026 ,रिपोर्टर/लेखक: जितेन्द्र कुशवाहा ,नई दिल्ली, 23 अगस्त 2026। आरोग्यशाला ट्रस्ट एवं VIAN फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में महान न्यूरोथेरेपिस्ट डॉ. लाजपत राय मेहरा जी के 94वें जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय न्यूरोथेरेपी संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सभागार, राजघाट, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से न्यूरोथेरेपी, स्वास्थ्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों, समाजसेवियों एवं गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूरोथेरेपी के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना, लोगों को प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूक करना तथा प्रशिक्षण के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाना रहा।

पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह को अणुव्रत पत्रिका भेंट, BWS के विजन से कराया अवगत

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि संजय भाई को आयोजक मंडल की ओर से स्मृति चिन्ह एवं अंग-वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजक मंडल के पदाधिकारी विष्णु सिंह बघेल एवं अंजु शर्मा जी ने उन्हें सम्मानित करते हुए उनके सामाजिक एवं जनहित से जुड़े कार्यों की सराहना की। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ अतिथि का स्वागत किया।

कार्यक्रम में डॉ. लाजपत राय मेहरा जी के जीवन, उनके स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में योगदान तथा न्यूरोथेरेपी के माध्यम से समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने के प्रयासों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसी संगोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

राष्ट्रीय न्यूरोथेरेपी संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों को न्यूरोथेरेपी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण सत्रों में स्वास्थ्य, जीवनशैली, शरीर की कार्यप्रणाली तथा स्वास्थ्य संरक्षण से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।

KMSS एकता मंच का महासम्मेलन दिल्ली में संपन्न, युवाओं की भागीदारी पर जोर

आयोजक मंडल ने कहा कि डॉ. लाजपत राय मेहरा जी का 94वां जन्मदिन केवल एक जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि उनके विचारों, कार्यों और समाज के प्रति योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उनके योगदान से प्रेरणा लेकर स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में आगे भी कार्य करने का संकल्प लिया गया।

राजघाट स्थित गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजन में शामिल अतिथियों, प्रशिक्षकों, पदाधिकारियों और प्रतिभागियों के प्रति आयोजक मंडल ने आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

स्थान: गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति का सभागार, राजघाट, नई दिल्ली
दिनांक: 23 अगस्त 2026
आयोजक: आरोग्यशाला ट्रस्ट एवं VIAN फाउंडेशन

मंगलवार, 25 अगस्त 2026

KMSS एकता मंच का महासम्मेलन दिल्ली में संपन्न, युवाओं की भागीदारी पर जोर

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026।* NGO कर्म मेरा सेवा सहयोग एकता मंच के तत्वावधान में रविवार को सैनी भवन, मंगोलपुरी, नई दिल्ली* में भव्य महासम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली सहित बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महासम्मेलन में लगभग *500 लोगों* की सहभागिता रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित अतिथियों एवं मंच के सदस्यों द्वारा *दीप प्रज्ज्वलित* कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ सामाजिक एकता, जागरूकता और समग्र विकास के लिए सामूहिक प्रयास का संदेश दिया गया।

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि देश के विकास में *युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।* युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवाओं को सही दिशा, शिक्षा और अवसर मिलें तो वे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।वक्ताओं ने युवाओं से शिक्षा, रोजगार, जागरूकता, नशामुक्ति, महिला सम्मान और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए यह NGO लगातार कार्यक्रम करके लोगो को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर जीवन के लिए कई योजनाओं के बारे में बता कर जागरूकता ला रही है।

खबर: आजादी के 80 साल: युवाओं के सपनों का भारत कितना पूरा हुआ?

कार्यक्रम में *बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों* से आए लोगों ने अपने विचार रखे। उपस्थित लोगों ने सामाजिक एकता को मजबूत करने, युवाओं को संगठित करने और आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा एवं संस्कार देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी अतिथियों, पदाधिकारियों, सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से महासम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और आने वाले समय में भी समाजहित से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम ने *सामाजिक एकता, युवा शक्ति और सामूहिक विकास* का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उपस्थित लोगों ने समाज के विकास और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

*रिपोर्टर — जितेंद्र कुमार नई दिल्ली*

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह को अणुव्रत पत्रिका भेंट, BWS के विजन से कराया अवगत



नई दिल्ली।
AVARD ऑफिस, डीडीयू मार्ग, ITO, नई दिल्ली में सामाजिक सरोकारों और समाजहित से जुड़े विषयों को लेकर एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस अवसर पर पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह जी को अणुव्रत पत्रिका भेंट की गई। पत्रिका भेंट करते समय संजय भाई, श्याम सिंह एवं पिंटू कुमार यादव उपस्थित रहे।

मुलाकात के दौरान सामाजिक जागरूकता, समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने तथा सकारात्मक सामाजिक बदलाव के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर संजय भाई ने BWS (बिहारी वेलफेयर सोसाइटी) के विजन और सामाजिक उद्देश्यों से गौतम झा, श्याम सिंह एवं पिंटू कुमार यादव को विस्तार से अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामूहिक भागीदारी, आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी आवश्यक है। समाज के जरूरतमंद, वंचित और कमजोर वर्गों तक सहयोग पहुंचाने तथा उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ।


बैठक में सामाजिक एकता, जागरूकता और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने अपने-अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं और समाज के जागरूक लोगों के बीच संवाद एवं सहयोग को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि समाज के लिए अधिक प्रभावी कार्य किए जा सकें।

अणुव्रत पत्रिका भेंट किए जाने के अवसर पर सामाजिक मूल्यों, नैतिकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को समाज में बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने सामाजिक जीवन में अच्छे विचारों और रचनात्मक गतिविधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह जी, संजय भाई, गौतम झा, श्याम सिंह एवं पिंटू कुमार यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

मुलाकात का उद्देश्य सामाजिक विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ समाजहित से जुड़े कार्यों को नई दिशा देना और आपसी सहयोग को मजबूत करना रहा।

स्थान: AVARD ऑफिस, डीडीयू मार्ग, ITO, नई दिल्ली रिपोर्ट: अनूप मौर्य

बुधवार, 19 अगस्त 2026

प्रकृति सेवा फाउंडेशन ने मनाया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस | बच्चों ने दी देशभक्ति प्रस्तुतियाँ

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा प्रकाशन तिथि: 19 अगस्त 2026

नई दिल्ली, 15 अगस्त। प्रकृति सेवा फाउंडेशन द्वारा भारत का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उमंग और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में कॉलोनी के बच्चों ने देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’, सदस्य सचिव एवं हिंदी अधिकारी, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, दिल्ली मध्य–1 (का.), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केंद्रीय विश्वविद्यालय), नई दिल्ली रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रवक्ता महंत प्रसाद, अवकाश प्राप्त शिक्षक गतिलाल, एमटीएनएल के अवकाश प्राप्त अधिकारी जयपाल तथा उदयभान पटेल उपस्थित रहे।

संस्था की कार्यकारिणी ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर अतिथियों ने बच्चों एवं उपस्थित नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’ ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में बच्चों को जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, शिक्षा, मेहनत और निरंतर प्रयास का महत्व बताया। उन्होंने बच्चों से लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी एवं लगन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

वहीं महंत प्रसाद ने भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम एवं बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे वीर जवानों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि केवल ध्वजारोहण कर लेने या राष्ट्रीय पर्व मना लेने से ही सच्ची देशभक्ति सिद्ध नहीं होती। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की प्रगति और समाज की बेहतरी में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा की शुरुआत अपने घर, परिवार और कॉलोनी से की जा सकती है।

उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने, समय का महत्व समझाने और बचपन से ही स्वच्छता की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से प्रत्येक कार्य समय पर करने तथा स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में उपाध्यक्ष दशरथ गोला, महासचिव गुलशन कुमार, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार गोला, कार्यालय प्रभारी लक्ष्मण गोला, मीडिया प्रभारी दिलीप, सचिव जितेंद्र गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य प्रेम सिंह कुंद्रा, राकेश कुमार जांगड़ा तथा युवा साथी आरव मौर्य का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, संस्था के पदाधिकारियों, सहयोगियों, अभिभावकों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा, स्वच्छता एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने की अपील की।

अंततः राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।

मंगलवार, 18 अगस्त 2026

छठ महापर्व की पांच मांगों को लेकर DM-ADM से मिला छठ महापर्व समन्वय मंच

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा नई दिल्ली। दिल्ली में छठ महापर्व के आयोजन को लेकर आ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर छठ महापर्व समन्वय मंच ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली जिला प्रभारी राजमणि कुमार बिंद के नेतृत्व में जिलाधिकारी (DM) एवं अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM) से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों के समक्ष छठ पूजा समितियों की समस्याएं रखते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग की।

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मंच ने छठ महापर्व को लेकर अपनी पांच प्रमुख मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। इनमें छठ महापर्व को राष्ट्रीय महापर्व का दर्जा देने, दिल्ली में छठ महापर्व आयोग का गठन करने तथा प्रत्येक जिले से कम से कम 10 वर्ष पुरानी छठ पूजा समिति के एक प्रतिनिधि को आयोग में सदस्य बनाने की मांग प्रमुख है।

इसके अलावा मंच ने मांग की कि दिल्ली सरकार छठ महापर्व के आयोजन के संबंध में 45 दिन पूर्व नोटिफिकेशन जारी करे, जिससे पूजा समितियों को घाटों, सुरक्षा, साफ-सफाई, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

मंच ने दिल्ली की यमुना नदी के किनारे वर्ष 2019 तक जिस प्रकार छठ महापर्व का आयोजन किया जाता था, उसी प्रकार दोबारा आयोजन की अनुमति एवं आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग रखी। साथ ही DDA से संबंधित नियमों में समानता की मांग करते हुए कहा गया कि अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए जो नियम लागू किए जाते हैं, वही नियम छठ महापर्व के आयोजनों पर भी समान रूप से लागू किए जाएं।

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मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि छठ महापर्व दिल्ली में रहने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता से जुड़ा पर्व है। इसलिए इसके आयोजन से संबंधित समस्याओं का स्थायी एवं व्यवस्थित समाधान आवश्यक है।

मंच ने बताया कि अगले दिन दिल्ली के तीन जिलों के DM से भी प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा। नई दिल्ली जिला के DM से छठ महापर्व के नई दिल्ली प्रभारी धर्मेंद्र शाह, मध्य दिल्ली जिला के DM से मध्य दिल्ली जिला प्रभारी शिव चौधरी तथा पुरानी दिल्ली जिला के DM से पुरानी दिल्ली जिला सह-प्रभारी चंदन गुप्ता के नेतृत्व में मुलाकात की जाएगी।

मंच ने छठ महापर्व से जुड़े सभी साथियों से अपील की कि जो लोग इस अभियान में शामिल होना चाहते हैं, वे सुबह 11 बजे संबंधित DM कार्यालय पहुंचकर अपना समर्थन दें।

छठ महापर्व समन्वय मंच ने कहा कि यह प्रयास किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि छठ महापर्व की गरिमा, परंपरा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़ा सामूहिक अभियान है।

सोमवार, 17 अगस्त 2026

हर घर तिरंगा अभियान: राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का संकल्प – दिनेश कुमार कुशवाहा

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर भारत सरकार, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं (NGO), रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) तथा अन्य संगठनों द्वारा “हर घर तिरंगा” अभियान उत्साहपूर्वक चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल प्रत्येक घर पर तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि नागरिकों के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान, गौरव और राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत करना है।

प्रकृति सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल सजावट या फैशन की वस्तु नहीं है, बल्कि यह देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराए और भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधानों का पालन करे।

उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि तिरंगे को हमेशा सम्मानपूर्वक लगाया जाए। खुले स्थान पर फहराए गए ध्वज के संबंध में लागू नियमों का पालन किया जाए तथा यदि रात में ध्वज फहराया जाता है तो उसके लिए उचित एवं निरंतर प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। फटे, गंदे या क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तिरंगा जमीन पर न गिरे और किसी भी प्रकार से उसका अनादर न हो।

आजादी के 80 साल: युवाओं के सपनों का भारत कितना पूरा हुआ?

दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि “हर घर तिरंगा” तभी सार्थक होगा, जब हर नागरिक के मन में तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना भी हो। हमें अपने बच्चों को भी राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और उसके सम्मान के संस्कार देने चाहिए। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने बड़ों को करते हुए देखते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद करने का भी दिन है। हमें तिरंगा फहराने के साथ-साथ उसके गौरव और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए।

प्रकृति सेवा फाउंडेशन ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे “हर घर तिरंगा” अभियान को जनभागीदारी का अभियान बनाएं और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को अपनी जिम्मेदारी समझें।

जय हिन्द!
वन्दे मातरम्! 🇮🇳

– दिनेश कुमार कुशवाहा
अध्यक्ष, प्रकृति सेवा फाउंडेशन

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

आजादी के 80 साल: युवाओं के सपनों का भारत कितना पूरा हुआ?

 

नई दिल्ली। भारत वर्ष 2027 में अपनी स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह अवसर केवल स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को स्मरण करने का नहीं, बल्कि पिछले आठ दशकों की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और आने वाले भारत की दिशा तय करने का भी है। विशेष रूप से युवाओं के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जिस भारत का सपना स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था और जिस विकसित, आत्मनिर्भर, आधुनिक तथा अवसरों से भरपूर भारत की कल्पना आज की पीढ़ी करती है, उस लक्ष्य को हमने कितना हासिल किया है?

स्वतंत्रता के समय भारत के सामने गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, कमजोर औद्योगिक आधार, सीमित संसाधन और सामाजिक असमानता जैसी अनेक चुनौतियां थीं। आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह उपलब्धियां बताती हैं कि पिछले 80 वर्षों में भारत ने लंबी यात्रा तय की है।

युवाओं के लिए बदला है अवसरों का संसार

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला युवा नहीं है, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी, तकनीक विकसित करने वाला इंजीनियर, शोधकर्ता, किसान-उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता, खिलाड़ी और वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला नागरिक भी है।

डिजिटल क्रांति ने युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं। इंटरनेट, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, स्टार्टअप और सोशल मीडिया ने छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर दिया है। आज कोई युवा अपने छोटे शहर से भी व्यवसाय शुरू कर सकता है, दुनिया के किसी भी हिस्से में अपनी सेवाएं पहुंचा सकता है और अपनी प्रतिभा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर सकता है।

लेकिन केवल तकनीकी सुविधा उपलब्ध हो जाना ही सपनों के भारत की पूर्णता नहीं है।

रोजगार अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

भारत के युवाओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न गुणवत्तापूर्ण रोजगार और स्थायी आय का है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी की तलाश करते हैं, लेकिन उनकी शिक्षा और बाजार की जरूरतों के बीच अंतर दिखाई देता है।

इसलिए आने वाले वर्षों में केवल डिग्री देने के बजाय कौशल, रोजगार और उद्यमिता आधारित शिक्षा पर अधिक जोर देना होगा। युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले जिससे वे बदलती अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं। भारत को इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।

शिक्षा में प्रगति, लेकिन गुणवत्ता पर ध्यान जरूरी

स्वतंत्रता के समय देश में शिक्षा की स्थिति बेहद सीमित थी। आज स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का विस्तार हुआ है तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ी है।

फिर भी हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चे और युवा को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता का अंतर कम करना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, डिजिटल संसाधन और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत का सपना

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष की ओर बढ़ते भारत के सामने आत्मनिर्भर और विकसित अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है। भारत ने विनिर्माण, स्टार्टअप, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल विदेशी वस्तुओं का विकल्प तैयार करना नहीं है। इसका अर्थ है—भारत में नवाचार, उत्पादन, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की मजबूत व्यवस्था तैयार करना।

युवाओं को इस परिवर्तन का केंद्र बनाना होगा। सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें युवा जोखिम लेकर नया व्यवसाय शुरू कर सकें और असफल होने के बाद भी दोबारा प्रयास कर सकें।

विकसित भारत केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं

सपनों का भारत केवल बड़ी अर्थव्यवस्था वाला भारत नहीं हो सकता। विकसित भारत का अर्थ ऐसा भारत होना चाहिए जहां हर नागरिक को सम्मान, सुरक्षा, न्याय और अवसर मिले।

महिलाओं की सुरक्षा और भागीदारी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वच्छ शहर और गांव, मजबूत सार्वजनिक परिवहन तथा गुणवत्तापूर्ण सरकारी सेवाएं भी विकसित भारत की पहचान होंगी।

युवाओं को भी यह समझना होगा कि देश निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। ईमानदारी से काम करना, कानून का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा करना, मतदान करना, सामाजिक भेदभाव का विरोध करना और जरूरतमंदों की मदद करना भी राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।

80 साल की उपलब्धियों का मूल्यांकन

अगर सवाल पूछा जाए कि आजादी के 80 साल बाद भारत ने अपने सपनों का कितना लक्ष्य हासिल किया है, तो इसका उत्तर न तो केवल उपलब्धियों की सूची में है और न ही केवल कमियों में।

भारत ने लंबी दूरी तय की है। आज देश आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है। लेकिन गरीबी, रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, सामाजिक असमानता और पर्यावरण जैसी चुनौतियां अभी भी हमारे सामने हैं।

इसलिए स्वतंत्रता के 80 वर्ष को उपलब्धियों के उत्सव के साथ आत्ममंथन का अवसर भी बनाया जाना चाहिए।

युवाओं के सपनों का भारत कैसा हो?

युवा जिस भारत का सपना देखते हैं, वह ऐसा भारत होना चाहिए जहां प्रतिभा को अवसर मिले, मेहनत का सम्मान हो, रोजगार के लिए पलायन मजबूरी न हो, गांवों में भी आधुनिक सुविधाएं हों, शिक्षा और स्वास्थ्य सबकी पहुंच में हों और युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो।

भारत की अगली यात्रा में युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्माता और भागीदार होंगे। आज का युवा यदि अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए, तो स्वतंत्रता की अगली मंजिल और अधिक मजबूत होगी।

आजादी के 80 वर्ष हमें यह संदेश देते हैं कि भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन मंजिल अभी बाकी है। आने वाला भारत कैसा होगा, यह केवल नीतियों से नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की सोच, मेहनत, नवाचार और जिम्मेदारी से तय होगा।

इसलिए आज आवश्यकता है कि हम उपलब्धियों पर गर्व करें, कमियों को स्वीकार करें और अगले दशक के लिए स्पष्ट संकल्प लें—ऐसा भारत बनाने का, जहां हर युवा को अपने सपनों को साकार करने का समान अवसर मिले और भारत दुनिया के सामने विकास, लोकतंत्र, मानवता और सामाजिक समरसता का उदाहरण बने।

प्रस्तुति: सामाजिक जागरूकता टाइम्स

हर घर तिरंगा अभियान: पटना में RLM ने किया राष्ट्रीय ध्वज सम्मान कार्यक्रम

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उपेंद्र कुशवाहा जी
 रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा पटना। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर देशभर में चलाए जा रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आज राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कैंप कार्यालय, पटना में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उपेंद्र कुशवाहा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा प्रदेश अध्यक्ष श्री आलोक सिंह जी के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

एनजीओ इंसाइड ने अपर्णा सर्व सेवा समिति को कैरम बोर्ड भेंट किया, जरूरतमंदों की मदद की अपील

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने तिरंगे की आन, बान और शान को बनाए रखने तथा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर पार्टी के नेता एवं माननीय पंचायती राज मंत्री श्री दीपक प्रकाश जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मदन चौधरी जी, सासाराम विधायक श्रीमती स्नेहलता कुशवाहा जी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रशांत कुमार पंकज जी, श्री सुभाष सिंह जी, प्रदेश प्रधान महासचिव श्री हिमांशु पटेल जी, महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती स्मृति कुमुद जी, अभियान समिति के अध्यक्ष श्री आर. के. सिन्हा जी, बिहार राज्य खाद्य आयोग के सदस्य श्री अंगद कुशवाहा जी, अनुशासन समिति के अध्यक्ष श्री जंगबहादुर सिंह जी, प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता श्री राम पुकार सिन्हा जी, प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता श्री ब्रजेंद्र कुमार पप्पू जी सहित पार्टी के अनेक नेता, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

500 फीट की तिरंगा यात्रा से गूंजा भाटी वार्ड, विधायक करतार सिंह तंवर और सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी हुए शामिल

वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा भारत की स्वतंत्रता, त्याग, संघर्ष और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान देशवासियों में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान लोगों से अपील की गई कि वे अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और राष्ट्रीय ध्वज का सदैव सम्मान करें।

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने तथा देशहित में पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति की भावना के साथ हुआ।

500 फीट की तिरंगा यात्रा से गूंजा भाटी वार्ड, विधायक करतार सिंह तंवर और सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी हुए शामिल

 

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा सामाजिक जागरूकता टाइम्स  नई दिल्ली।14 अगस्त 2026 दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के भाटी वार्ड में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत 500 फीट लंबी तिरंगा यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे क्षेत्र में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से वातावरण गूंज उठा।

इस अवसर पर छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक माननीय करतार सिंह तंवर, दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी तथा भाटी माइंस वार्ड के निगम पार्षद सुंदर सिंह तंवर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधियों ने तिरंगे के साथ यात्रा में शामिल होकर नागरिकों का उत्साह बढ़ाया।

सभी नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत हैं माता सावित्रीबाई फुले : सविता सिंह कुशवाहा

500 फीट लंबे राष्ट्रीय ध्वज को लेकर निकाली गई यह यात्रा भाटी वार्ड के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। रास्ते में स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया। बच्चों, युवाओं और महिलाओं में भी कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता, गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के लिए जागरूक करना है।



वक्ताओं ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने और देश के प्रति सम्मान एवं जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यात्रा के दौरान लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाए। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और उत्साह का माहौल बना रहा। आयोजन में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि 500 फीट की तिरंगा यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

भव्य तिरंगा यात्रा के समापन पर देश की एकता, अखंडता और समृद्धि की कामना की गई। कार्यक्रम ने भाटी वार्ड में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक संदेश दिया।

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

कांवड़ यात्रा: आस्था या आस्था के नाम पर खिलवाड़? | सामाजिक जागरूकता टाइम्स

भारत की पहचान केवल उसकी विविध संस्कृतियों और परंपराओं से नहीं, बल्कि उन परंपराओं के पीछे छिपी आस्था, संयम और सामाजिक मूल्यों से भी होती है। सावन का महीना आते ही देश के अनेक हिस्सों में कांवड़ यात्रा का दृश्य दिखाई देने लगता है। कंधे पर कांवड़, उसमें पवित्र गंगाजल और मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा लेकर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु लंबी दूरी तय करते हैं। यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि तप, त्याग, अनुशासन, सेवा और सामूहिक आस्था का भी प्रतीक रही है। लेकिन आज सवाल यह उठने लगा है कि बदलते परिवेश में कांवड़ यात्रा अपनी मूल भावना के साथ आगे बढ़ रही है या कहीं-कहीं आस्था के नाम पर उसका स्वरूप बदल रहा है?

जनसंख्या के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर हो प्राथमिकता: दिनेश कुमार कुशवाहा

कांवड़ यात्रा की मूल भावना अत्यंत सरल और पवित्र है। श्रद्धालु गंगा या अन्य पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। कई कांवड़िए पैदल यात्रा करते हैं, कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं और अपनी मनोकामना तथा श्रद्धा को शिवभक्ति से जोड़ते हैं। रास्ते में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग कांवड़ियों की सेवा करते हैं। कहीं भोजन की व्यवस्था होती है तो कहीं पानी, चिकित्सा और विश्राम की सुविधा। इस दृष्टि से कांवड़ यात्रा भारतीय समाज में सहयोग और सेवा की भावना का भी उदाहरण है।

कांवड़ यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें जाति, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति की सीमाएं काफी हद तक पीछे छूट जाती हैं। गांव से लेकर महानगर तक लोग अपनी क्षमता के अनुसार श्रद्धालुओं की सेवा करते हैं। यह सामाजिक सहभागिता भारतीय संस्कृति की उस भावना को मजबूत करती है जिसमें कहा गया है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

लेकिन समय के साथ हर परंपरा की तरह कांवड़ यात्रा का स्वरूप भी बदला है। आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और बढ़ती भव्यता ने धार्मिक आयोजनों को नया रूप दिया है। बड़े-बड़े डीजे, अत्यधिक ध्वनि, विशाल वाहनों, आकर्षक सजावट और सोशल मीडिया पर प्रदर्शन ने कई स्थानों पर धार्मिक यात्रा को उत्सव और शक्ति-प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है। सवाल यह नहीं है कि उत्सव क्यों मनाया जाए, बल्कि सवाल यह है कि उत्सव मनाते समय क्या हम उस आस्था की मूल भावना को बचा पा रहे हैं जिसके कारण यह यात्रा शुरू हुई थी?

धर्म मनुष्य को जोड़ने का माध्यम है, टकराव का नहीं। यदि धार्मिक यात्रा के दौरान यातायात बाधित हो, एंबुलेंस को रास्ता न मिले, आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी हो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचे या किसी दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचे, तो हमें निश्चित रूप से आत्ममंथन करना चाहिए। श्रद्धा का अर्थ यह नहीं हो सकता कि हमारे अधिकार दूसरों की सुविधा और अधिकारों से ऊपर हो जाएं।

इसी प्रकार तेज आवाज में डीजे बजाना भी विचार का विषय है। भक्ति संगीत और धार्मिक गीत श्रद्धा को मजबूत कर सकते हैं, लेकिन ध्वनि की सीमा और समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अस्पतालों, विद्यालयों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के आसपास अत्यधिक शोर किसी के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए धर्म और कानून दोनों का सम्मान करना ही सच्ची धार्मिकता है।

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यह भी ध्यान रखना होगा कि कुछ घटनाओं या कुछ व्यक्तियों के व्यवहार के आधार पर पूरी कांवड़ यात्रा को गलत ठहराना न्यायसंगत नहीं है। लाखों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, अनुशासन और शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा करते हैं। वे रास्ते में स्वच्छता रखते हैं, जरूरतमंदों की सहायता करते हैं और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखते हैं। ऐसे श्रद्धालु वास्तव में कांवड़ यात्रा की गरिमा को आगे बढ़ाते हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया की भी इस विषय में बड़ी जिम्मेदारी है। किसी एक विवादित घटना को पूरे धार्मिक समुदाय के व्यवहार के रूप में प्रस्तुत करना समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है। वहीं, गलत व्यवहार को केवल धार्मिक भावना के नाम पर नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है। पत्रकारिता का दायित्व है कि वह तथ्य को तथ्य के रूप में सामने रखे और समाज को संतुलित दृष्टिकोण दे।

सरकार और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल और सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा—दोनों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।


कांवड़ यात्रा को और अधिक अनुकरणीय बनाने के लिए इसे स्वच्छता और पर्यावरण से भी जोड़ा जा सकता है। कांवड़ मार्ग पर प्लास्टिक का कम उपयोग, कचरे का उचित निपटान, पौधारोपण और जल संरक्षण जैसे अभियान चलाए जा सकते हैं। यदि शिवभक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश भी दिया जाए तो धार्मिक यात्रा समाज के लिए एक सकारात्मक आंदोलन बन सकती है।

आखिरकार प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि कांवड़ यात्रा आस्था है या खिलवाड़। कांवड़ यात्रा अपने मूल स्वरूप में निश्चित रूप से आस्था है। लेकिन जब आस्था के नाम पर अनुशासन समाप्त हो जाए, दिखावा भक्ति पर भारी पड़ जाए और दूसरों के अधिकारों की अनदेखी होने लगे, तब उस व्यवहार को आस्था की गरिमा के साथ खिलवाड़ कहना गलत नहीं होगा।

भगवान शिव की आराधना हमें त्याग, संयम, करुणा और सत्य का मार्ग दिखाती है। इसलिए सच्चा कांवड़िया वही है जो कंधे पर कांवड़ के साथ अपने व्यवहार में भी शिवत्व लेकर चले। उसके कदमों से किसी को परेशानी न हो, उसकी भक्ति से समाज में सद्भाव बढ़े और उसकी यात्रा से सेवा एवं स्वच्छता का संदेश जाए।

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कांवड़ केवल कंधे पर उठाया गया गंगाजल नहीं है; यह मन, विचार और व्यवहार को पवित्र करने की यात्रा भी है। यदि हम इस भावना को समझ लें तो कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था की पहचान बनेगी, बल्कि सामाजिक सद्भाव, अनुशासन और सेवा का भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।

लेखक: जितेंद्र कुशवाहा
विचारक एवं सामाजिक चिंतक

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

जनसंख्या के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर हो प्राथमिकता: दिनेश कुमार कुशवाहा

 

नई दिल्ली। प्रकृति सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा है कि यदि देश में बढ़ती जनसंख्या के आधार पर संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, तो उससे पहले आम नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सेवाओं का समान अनुपात में विस्तार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उसकी जनता होती है। ऐसे में विकास की प्राथमिकता आम नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना होना चाहिए। उनका कहना है कि देश के अनेक क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों का विलय किया जा रहा है, जबकि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा चुनाव, जनगणना और विभिन्न सरकारी कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।

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स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। इसके कारण मरीजों को लंबी प्रतीक्षा, समय पर उपचार न मिलने और आवश्यक जांच में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनका सुझाव है कि बढ़ती आबादी के अनुरूप स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार किया जाए।

रेल परिवहन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई ट्रेनों का संचालन स्वागत योग्य है, लेकिन सामान्य यात्रियों के लिए किफायती और सुलभ रेल सेवाओं का पर्याप्त विस्तार भी आवश्यक है। भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और टिकट संबंधी कठिनाइयों का समाधान जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप किया जाना चाहिए।

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उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के कारण नागरिकों को प्रमाण-पत्र, पेंशन, राजस्व, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक व्यवस्था को भी समय के साथ मजबूत बनाया जाना चाहिए।

दिनेश कुमार कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि सांसद लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं और उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि स्कूलों में शिक्षक, अस्पतालों में डॉक्टर, सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी और सार्वजनिक सेवाओं में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो केवल सांसदों की संख्या बढ़ाने से आम जनता की समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सांसदों की संख्या बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय से पहले शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए मजबूत किया जाए। साथ ही नागरिकों से भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

✍️ दिनेश कुमार कुशवाहा
अध्यक्ष, प्रकृति सेवा फाउंडेशन

एनजीओ इंसाइड ने अपर्णा सर्व सेवा समिति को कैरम बोर्ड भेंट किया, जरूरतमंदों की मदद की अपील

अमरेश मौर्य ने खेलों को बढ़ावा देने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए पुरानी उपयोगी वस्तुएं दान करने की अपील की। कार्यक्रम में समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा भी उपस्थित रहे।

नई दिल्ली, 06 अगस्त 2026। युवाओं और बच्चों में खेल भावना को विकसित करने तथा इनडोर खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एनजीओ इंसाइड के संस्थापक अमरेश मौर्य ने अपर्णा सर्व सेवा समिति को एक कैरम बोर्ड भेंट किया। इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा, संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा खेलों के माध्यम से स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण का संदेश देना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमरेश मौर्य ने कहा कि आज के समय में बच्चे और युवा मोबाइल फोन, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों पर अत्यधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। इसके कारण उनकी शारीरिक गतिविधियाँ कम होती जा रही हैं और सामाजिक सहभागिता भी प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में कैरम जैसे इनडोर खेल न केवल मनोरंजन का सशक्त माध्यम हैं, बल्कि एकाग्रता, धैर्य, अनुशासन, रणनीतिक सोच और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति और संगठन को बच्चों एवं युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए आगे आना चाहिए।

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इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि खेल किसी भी समाज के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं। खेल बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा अनुशासन का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज में इस प्रकार की सकारात्मक पहलें लगातार होती रहें, तो युवा वर्ग नशे, तनाव और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकता है। उन्होंने एनजीओ इंसाइड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाजहित में कार्य करने वाले संगठनों को मिलकर जनजागरूकता एवं सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान एनजीओ इंसाइड की ओर से उपस्थित लोगों एवं बच्चों को पेन भी वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना तथा यह संदेश देना था कि शिक्षा और खेल दोनों मिलकर व्यक्तित्व निर्माण की मजबूत नींव रखते हैं।

इस अवसर पर अमरेश मौर्य ने समाज के सभी नागरिकों से एक महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा कि यदि आपके घर में ऐसी कोई उपयोगी वस्तु—जैसे कपड़े, पुस्तकें, स्कूल बैग, खिलौने, बर्तन, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खेल सामग्री या अन्य आवश्यक वस्तुएँ—रखी हैं, जिनका आप अब उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें फेंकने के बजाय एनजीओ इंसाइड को उपलब्ध कराएँ। संस्था इन वस्तुओं को एकत्रित कर जरूरतमंद, गरीब एवं वंचित लोगों तक सम्मानपूर्वक पहुँचाने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से अनेक परिवारों, विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने भी लोगों से आगे आकर इस मुहिम में सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन वस्तुओं का हमारे जीवन में अब कोई उपयोग नहीं रह गया है, वही वस्तुएँ किसी जरूरतमंद परिवार के लिए नई उम्मीद और सहारा बन सकती हैं। समाज सेवा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगी वस्तुओं का दान भी मानवता की सच्ची सेवा है।

अपर्णा सर्व सेवा समिति के पदाधिकारियों ने अमरेश मौर्य एवं एनजीओ इंसाइड का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, खेल एवं जनसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। प्राप्त कैरम बोर्ड और अन्य सहयोग से बच्चों एवं युवाओं को खेल गतिविधियों में भाग लेने का बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक विकास भी होगा।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करे, तो एक संवेदनशील, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण किया जा सकता है। एनजीओ इंसाइड की यह पहल सामाजिक सहभागिता, खेल प्रोत्साहन और जनसेवा की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा
सामाजिक जागरूकता टाइम्स

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