मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है — जितेंद्र कुशवाहा


 आज समाज और गांव के विकास के लिए सबसे पहली आवश्यकता है—अपनी ताकत को पहचानना। हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई क्षमता, हुनर और सामर्थ्य छिपा होता है, लेकिन हम अक्सर अपनी शक्ति को कम आंकते हैं। जब तक हम स्वयं पर विश्वास नहीं करेंगे, तब तक न तो अपने परिवार का, न अपने गांव का और न ही समाज का सही अर्थों में विकास कर पाएंगे।

गांव की असली ताकत वहां के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हैं। युवा जोश, ऊर्जा और नए विचारों के साथ बदलाव की दिशा तय कर सकते हैं। बुजुर्ग अपने अनुभव और संस्कारों से सही मार्गदर्शन दे सकते हैं, वहीं महिलाएं गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक रीढ़ होती हैं। जब ये सभी अपनी-अपनी ताकत को पहचानकर एकजुट होते हैं, तभी सशक्त और आत्मनिर्भर गांव का निर्माण संभव होता है।

आज आवश्यकता है कि हम संगठित होकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गंभीरता से कार्य करें। छोटे-छोटे प्रयास—जैसे बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना, नशा मुक्ति अभियान चलाना, बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देना और आपसी भाईचारे को मजबूत करना—बड़े बदलाव का आधार बनते हैं।

अपनी ताकत को पहचानने का अर्थ केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी को समझना भी है। जब हम यह तय कर लेते हैं कि “गांव मेरा है और उसका विकास मेरी जिम्मेदारी है”, तभी सच्चे बदलाव की शुरुआत होती है। आइए, हम सब मिलकर अपनी ताकत को पहचानें, एक-दूसरे का हाथ थामें और अपने गांव व समाज को विकास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई दिशा दें।

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