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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

आलू मोड़ पर MCD की लापरवाही, कूड़े में प्लास्टिक खा रही हैं गौ माता

भाटी माइंस के आलू मोड़ पर MCD की लापरवाही के कारण कूड़े के ढेर में प्लास्टिक खाती गौ माता।नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के भाटी माइंस स्थित आलू मोड़ क्षेत्र में नगर निगम (MCD) की सफाई व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण डस्टबिन के आसपास कूड़े का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना हुआ है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार, सफाई कर्मचारी प्रतिदिन केवल डस्टबिन के अंदर मौजूद कचरे को उठाकर चले जाते हैं, जबकि डस्टबिन के बाहर फैला प्लास्टिक, कागज़, पॉलीथिन, खाद्य सामग्री का कचरा और अन्य गंदगी वहीं पड़ी रहती है। धीरे-धीरे यह कूड़ा एक बड़े ढेर का रूप ले लेता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि कचरे से मच्छर और मक्खियाँ पनपने लगती हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे स्वच्छता अभियान के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि कूड़े के ढेर में गौ माता और अन्य आवारा पशु भोजन की तलाश में प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य हानिकारक अपशिष्ट खा रहे हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार प्लास्टिक का सेवन पशुओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। इससे उनके पाचन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, कई बार जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कूड़े का उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो यह न केवल पशुओं बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

निवासियों का कहना है कि यदि सफाई कर्मचारी डस्टबिन के साथ-साथ उसके आसपास फैले कचरे की भी नियमित सफाई करें, तो क्षेत्र को साफ-सुथरा और स्वच्छ रखा जा सकता है। उनका मानना है कि केवल डस्टबिन खाली कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आसपास की सफाई भी उतनी ही आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि आलू मोड़ क्षेत्र की सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए तथा संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि डस्टबिन के आसपास फैले कचरे को भी प्रतिदिन हटाया जाए तथा खुले में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट न पड़े रहें। इससे क्षेत्रवासियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और गौ माता सहित अन्य पशुओं का जीवन भी सुरक्षित रह सकेगा।📖 यह भी पढ़ें :जनपथ मार्केट का इतिहास: दिल्ली के सबसे लोकप्रिय बाजार की पूरी कहानी

क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि नगर निगम इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करेगा, ताकि भाटी माइंस के आलू मोड़ क्षेत्र को गंदगी, दुर्गंध और खुले कचरे से मुक्ति मिल सके।

🖊️ रिपोर्ट: अमित कुमार झा, संवाददाता
भाटी माइंस, नई दिल्ली

मंगलवार, 14 जुलाई 2026

सेल्फी नहीं, संरक्षण की सोच अपनाएँ: पौधा तभी लगाएँ जब उसकी देखभाल कर सकें – जितेंद्र कुशवाहा


सेल्फी नहीं, संरक्षण की सोच अपनाएँ: पौधा तभी लगाएँ जब उसकी देखभाल कर सकें

आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है। बढ़ता प्रदूषण, घटते जंगल, जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी हमें लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अब भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की कल्पना करना कठिन होगा। ऐसे समय में देशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लगाए गए पौधों में से कितने वास्तव में वृक्ष बन पाते हैं?

अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी सरकारी अभियान, सामाजिक कार्यक्रम या सोशल मीडिया पर फोटो साझा करने के उद्देश्य से पौधे लगा देते हैं। पौधारोपण के बाद कुछ तस्वीरें ली जाती हैं, प्रशंसा मिलती है और फिर पौधों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। पानी, सुरक्षा और देखभाल के अभाव में अधिकांश पौधे कुछ ही समय में सूख जाते हैं। ऐसे में पौधारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखना और वृक्ष बनने तक उनका पालन-पोषण करना है। एक पौधे को वृक्ष बनने में कई वर्षों का समय लगता है। इस दौरान नियमित सिंचाई, उचित खाद, पशुओं से सुरक्षा और समय-समय पर देखभाल आवश्यक होती है। यदि यह जिम्मेदारी नहीं निभाई जाती, तो पौधारोपण केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।

पर्यावरण संरक्षण ही जीवन है : डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता अभियान आयोजित

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कम पौधे भी लगाए जाएँ, लेकिन उनकी पूरी देखभाल की जाए, तो उसका लाभ हजारों सूखे पौधों से कहीं अधिक होगा। एक विकसित वृक्ष न केवल ऑक्सीजन देता है, बल्कि वातावरण को शुद्ध करता है, तापमान कम करता है, भूजल संरक्षण में मदद करता है और जैव विविधता को भी सुरक्षित रखता है।

विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी विभागों को भी वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि प्रत्येक पौधे की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति, संस्था या समूह को दी जाए, तो उनके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ सकती है।

इस अवसर पर सामाजिक जागरूकता टाइम्स के संपादक जितेंद्र कुशवाहा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा—

"पौधा तभी लगाएँ, जब आप उसके पालन-पोषण का संकल्प ले सकें। केवल 1–2 सेल्फी या औपचारिकता के लिए नर्सरी में पल रहे एक जीवित पौधे की जान न लें। वृक्षारोपण का वास्तविक उद्देश्य पौधे को वृक्ष बनाना होना चाहिए, न कि केवल फोटो खिंचवाना।"

उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में केवल एक पौधे की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा ले, तो देश को हरा-भरा बनाने का सपना साकार हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण सरकार या किसी संस्था की अकेली जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

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आज आवश्यकता इस बात की है कि पौधारोपण को केवल अभियान या उत्सव तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे जनभागीदारी और जिम्मेदारी का आंदोलन बनाया जाए। जब तक लगाया गया पौधा एक मजबूत वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसकी देखभाल करना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है।

संदेश:
"सेल्फी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए पौधे लगाइए। पौधा लगाना शुरुआत है, उसे वृक्ष बनाना हमारी जिम्मेदारी है।"

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा
प्रकाशन: सामाजिक जागरूकता टाइम्स
प्रकाशन तिथि: 14 जुलाई 2026 (मंगलवार)

सोमवार, 8 जून 2026

पर्यावरण संरक्षण ही जीवन है : डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता अभियान आयोजित

पर्यावरण संरक्षण ही जीवन है : डॉ. आलोक कुमार मिश्रा

जितेंद्र कुशवाहा,संवाददाता : नई दिल्ली विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के निर्देशन में एवं अणुव्रत समिति ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा आचार्य तुलसी सर्वोदय बाल विद्यालय, छतरपुर, महरौली में विश्व पर्यावरण दिवस जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अवसर पर गत वर्ष लगाए गए 101 पेड़ों की जांच एवं सफाई अभियान चलाया गया। साथ ही दर्जनों नए पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण एवं रखरखाव का संकल्प लिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, संयुक्त सचिव, भारतीय विश्वविद्यालय संघ रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में राकेश कुमार यादव, संयुक्त निदेशक, नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत सरकार तथा मनदीप कुमार, प्राचार्य, आचार्य तुलसी सर्वोदय बाल विद्यालय उपस्थित रहे।







सभी नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत हैं माता सावित्रीबाई फुले : सविता सिंह कुशवाहा

  सविता सिंह कुशवाहा, उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन   नई दिल्ली  भारत की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति के इतिहास में यदि किसी महा...

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