नई दिल्ली।
समाज के संपूर्ण और सतत विकास के लिए नागरिकों का शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। इसी को रेखांकित करते हुए समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि “समाज के संपूर्ण विकास में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना समाजसेवियों का परम धर्म है।”
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होता है। आज बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, प्रदूषण और तनाव के कारण अनेक गंभीर बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं। ऐसे में समाजसेवियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे आमजन को स्वास्थ्य के प्रति सजग करें, नियमित जांच, स्वच्छता, योग, व्यायाम और संतुलित आहार को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करें।
जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुविधाएँ पहुँचाना समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य है। स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान, नशा मुक्ति, स्वच्छ भारत जैसे कार्यक्रम समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “इलाज से बेहतर बचाव है” के सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। जब समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ होगा, तभी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक समरसता का सपना साकार हो सकेगा।
अंत में उन्होंने सभी समाजसेवियों, युवाओं और संगठनों से आह्वान किया कि वे स्वास्थ्य जागरूकता को जनआंदोलन बनाएं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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