जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना बनकर रह गया है, जबकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य एक जिम्मेदार, संवेदनशील और नैतिक नागरिक का निर्माण करना होना चाहिए। संस्कारविहीन शिक्षा समाज में असंतुलन, हिंसा, स्वार्थ और नैतिक पतन को बढ़ावा देती है, जो भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा ही कल के भारत का निर्माण करेगा। यदि युवा पीढ़ी स्वयं अनुशासन, ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में अपनाएगी, तभी वह आने वाली पीढ़ी को सही मार्गदर्शन दे सकेगी। युवा अपने आचरण से बच्चों के लिए आदर्श बनें—यही सबसे बड़ा योगदान होगा।
जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बदलते डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ऐसे में माता-पिता, शिक्षक और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को सही-गलत का बोध कराया जाए और उन्हें सकारात्मक संस्कारों से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि संस्कारयुक्त बच्चे ही सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं। जब शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाएंगे, तभी गांव, समाज और देश का संपूर्ण और सतत विकास संभव हो सकेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि देश की दिशा डिग्रियों से नहीं, बल्कि संस्कारों से तय होती है, और इसकी शुरुआत हर घर से होनी चाहिए।

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