नई दिल्ली, 02 जून 2026। संवाददाता : जितेन्द्र कुशवाहा। सुप्रीम कोर्ट एवं दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता दीपक मिश्रा ने युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, मार्गदर्शन, युवा सशक्तिकरण और परस्पर सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को एक-दूसरे का सहयोग करने तथा सही दिशा में मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है, ताकि वे अपनी आजीविका को सुरक्षित एवं सुदृढ़ बना सकें तथा बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
उन्होंने
कहा कि प्रत्येक युवा
को यह समझना चाहिए
कि शिक्षा ही वह महत्वपूर्ण
कुंजी है, जो जीवन को
सफलता और सम्मान की
ओर ले जाती है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न केवल व्यक्ति
को ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और व्यवहार को
भी सकारात्मक दिशा देती है। शिक्षित और जागरूक युवा
समाज तथा राष्ट्र के विकास में
अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। यही शिक्षा युवा सशक्तिकरण का
सबसे मजबूत
आधार है।
एडवोकेट दीपक
मिश्रा ने
कहा कि
वर्तमान समय
में अनेक
युवा विधिक
सेवा और
सामाजिक न्याय
के क्षेत्र
में अपना
महत्वपूर्ण योगदान
दे रहे
हैं। विधिक जागरूकता युवाओं
को अपने
अधिकारों और
कर्तव्यों के
प्रति सचेत
बनाती है
तथा समाज
में न्याय,
समानता और
उत्तरदायित्व की
भावना को
मजबूत करती
है। उन्होंने
कहा कि
कानून की
जानकारी युवाओं
को सामाजिक
चुनौतियों का
सामना करने
और सही
निर्णय लेने
में सहायता
प्रदान करती
है।
उन्होंने कहा
कि शिक्षा
हमें सही
और गलत
के बीच
अंतर करना
सिखाती है,
जबकि कानून
हमें सही
के पक्ष
में खड़े
होने का
साहस और
शक्ति प्रदान
करता है।
यदि समाज
का प्रत्येक
नागरिक युवाओं
को प्रोत्साहित
करने, शिक्षित
करने और
उनका मार्गदर्शन
करने में
अपनी भूमिका
निभाए, तो
एक सशक्त,
जागरूक, न्यायप्रिय
और प्रगतिशील
समाज का
निर्माण संभव
हो सकेगा।
दीपक मिश्रा
ने युवाओं
से आह्वान
किया कि
वे शिक्षा,
नैतिक मूल्यों,
विधिक जागरूकता और
सकारात्मक सोच
को अपने
जीवन का
आधार बनाकर
राष्ट्र निर्माण
में सक्रिय
योगदान दें
तथा स्वयं
के साथ-साथ समाज के
विकास में
भी भागीदार
बनें।

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