शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

एक व्यक्ति, एक पद से मजबूत होगी सामाजिक भागीदारी : जितेंद्र कुशवाहा

नई दिल्ली। सामाजिक संगठनों में एक ही व्यक्ति के कई पदों पर बने रहने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक जागरूकता टाइम्स के प्रधान संपादक जितेंद्र कुशवाहा ने समाज और सामाजिक संस्थाओं से आत्ममंथन की अपील की है।

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सामाजिक संगठनों का मूल उद्देश्य पद, सम्मान और मंच तक सीमित रहना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य करना होना चाहिए। जब एक ही व्यक्ति कई संस्थाओं में महासचिव, सचिव, उपाध्यक्ष या अन्य पदों पर जिम्मेदारी संभालता है, तो नए और योग्य लोगों को नेतृत्व का अवसर सीमित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि पद सम्मान नहीं, जिम्मेदारी है। किसी संगठन की वास्तविक सक्रियता का आकलन मंचीय कार्यक्रमों, मालाओं और तस्वीरों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि उसके पदाधिकारी समाज के बीच कितने समय रहते हैं और लोगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रयास करते हैं।

कुशवाहा ने कहा कि केवल कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराना और सम्मान प्राप्त करना समाज सेवा का विकल्प नहीं हो सकता। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और युवाओं से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए लोगों के बीच जाना और उनकी परिस्थितियों को करीब से देखना जरूरी है। फोटो में दिखाई देने वाली सक्रियता तभी सार्थक है, जब उसका असर जमीन पर भी दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद सामाजिक स्तर पर अनेक चुनौतियां हमारे सामने हैं। इनका समाधान केवल बैठकों और औपचारिक आयोजनों से संभव नहीं है। इसके लिए निरंतर संवाद, जनभागीदारी और धरातल पर काम करने की आवश्यकता है।

जितेंद्र कुशवाहा ने सामाजिक संगठनों से “एक व्यक्ति, एक पद” की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की अपील की। इससे जिम्मेदारियों का व्यापक वितरण होगा, युवाओं और नए कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा तथा संगठनों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो पद और सम्मान से अधिक सेवा, जवाबदेही और जमीनी कार्य को महत्व दे। सामाजिक संस्थाओं को भी अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कार्यक्रमों की संख्या से अधिक उनके सामाजिक प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे केवल पदाधिकारियों की संख्या नहीं, बल्कि उनके वास्तविक कार्यों को महत्व दें और सामाजिक विकास में सक्रिय, ईमानदार तथा जमीनी भागीदारी को प्रोत्साहित करें।

— जितेंद्र कुशवाहा
प्रधान संपादक
सामाजिक जागरूकता टाइम्स

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