इस अवसर पर समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले का पूरा जीवन शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा, "आप अपने बच्चों को हर हाल में शिक्षित कीजिए, भले ही इसके लिए आपको दो रोटी कम खानी पड़े। शिक्षा ही वह सबसे बड़ी पूंजी है, जो किसी भी व्यक्ति और समाज का भविष्य बदल सकती है।" उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि शिक्षित समाज ही जागरूक, आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र की नींव रखता है।
वक्ताओं ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में अनेक प्रकार की सामाजिक कुरीतियाँ व्याप्त थीं। उन्होंने अपने साहस, त्याग और संघर्ष के बल पर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। आज भी उनके विचार और जीवन संघर्ष प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप के सदस्यों ने कहा कि सम्मान का उद्देश्य केवल डायरी भेंट करना नहीं, बल्कि युवाओं में अध्ययन की आदत विकसित करना, सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना तथा महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। उनका मानना है कि जब युवा अपने जीवन में शिक्षा, समानता, सेवा और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को अपनाएंगे, तभी एक सशक्त, संगठित और जागरूक समाज का निर्माण संभव होगा।
सम्मान प्राप्त करने वाले युवाओं ने इस पहल के लिए मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले की डायरी उनके लिए केवल एक स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि जीवन में निरंतर सीखने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने और सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा है।
समाज के वरिष्ठ लोगों ने मौर्य फ्रेंड्स ग्रुप की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को महापुरुषों के विचारों और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे प्रयास नई पीढ़ी में सकारात्मक सोच, सामाजिक चेतना, नेतृत्व क्षमता और सेवा भाव का विकास करते हैं तथा शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करते हैं।
