समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने अपने गांव एवं ग्रामीण समाज से विकास के लिए सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति महीने में कम-से-कम दो दिन गांव और समाज के विकास को समर्पित करे, तो गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। जितेन्द्र कुशवाहा ने जोर देते हुए कहा कि गांव हमारी जड़, संस्कृति और पहचान है, इसलिए इसके उत्थान की जिम्मेदारी हम सभी की है।
उन्होंने बताया कि स्वच्छता अभियान, शिक्षा के प्रसार, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और रोजगार के अवसर सृजित करने जैसे कार्यों में हर व्यक्ति अपना समय और सहयोग दे सकता है। इससे न केवल गांव स्वच्छ और शिक्षित बनेगा, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ेंगे।
जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि बदलाव केवल सरकार या प्रशासन पर निर्भर नहीं रह सकता। जब तक समाज स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक स्थायी विकास संभव नहीं है। यदि हर ग्रामीण अपने अनुभव, श्रम और ज्ञान को साझा करे, तो गांव में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से गांव मजबूत, स्वावलंबी और आदर्श बन सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिलेगा।
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