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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

हमारी संस्कृति सबसे बड़ी विरासत है – जितेन्द्र कुशवाहा

समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी विरासत है। यही वह आधार है, जो हमें हमारी पहचान, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ता है। भारतीय संस्कृति केवल रीति-रिवाजों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सशक्त और समृद्ध पद्धति है, जिसमें मानवता, सेवा, त्याग, करुणा और सम्मान जैसे गुण समाहित हैं।

उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में तकनीक और विकास के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूलना उचित नहीं है। हमारी संस्कृति हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देती है। यह हमें सिखाती है कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ सभी को एक परिवार मानकर चलें।

जितेन्द्र कुशवाहा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी भाषा, परंपरा, त्योहारों और नैतिक मूल्यों को अपनाएँ और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति को सहेज कर रखेंगे, तो हमारा समाज सशक्त और संगठित बना रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति ही समाज की आत्मा है। जब हम अपनी विरासत का सम्मान करते हैं, तब ही हम सच्चे अर्थों में प्रगति कर सकते हैं। शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना होगा।

अंत में उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है, और इसे संजोकर रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

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