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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

"जब जेब में सिगरेट के पैसे हैं, तो पढ़ाई के लिए क्यों नहीं?" — समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा

 

 

आज के दौर में बहुत से युवा आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में केवल पैसों की कमी ही इसकी जड़ है?

समाजसेवी जितेन्द्र कुशवाहा, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन के संस्थापक, इस विषय पर अपने विचार रखते हुए कहते हैं —
“आज का युवा मोबाइल रिचार्ज, सिगरेट, तम्बाकू और गुटखे पर हजारों रुपए खर्च कर देता है, लेकिन जब पढ़ाई या किसी अच्छे काम की बात आती है, तो पैसे की कमी का बहाना बना देता है।”

उनका मानना है कि समस्या पैसे की नहीं, सोच की है। यदि युवा अपनी प्राथमिकता शिक्षा को बना लें, तो कोई भी आर्थिक बाधा बड़ी नहीं होती। कई महान लोगों ने गरीबी में पढ़ाई करके इतिहास रचा है।

इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे अपनी बुरी आदतों को छोड़कर शिक्षा और कौशल विकास में निवेश करें। यही सच्ची प्रगति की दिशा है।

जितेन्द्र कुशवाहा जी का संदेश स्पष्ट है —
“अगर आपने सिगरेट, तम्बाकू और गुटका छोड़ दिया, तो न केवल पैसे बचेंगे बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य दोनों सुरक्षित रहेंगे। जो युवा अपने पैसे और समय का सही उपयोग करता है, वही समाज का सच्चा निर्माता बनता है।”


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