बुधवार, 24 जून 2026

शिक्षक हैं राष्ट्र निर्माण की नींव, उन्हें मिले सर्वोच्च सम्मान : समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा

 

राष्ट्र निर्माण की नींव, फिर भी सम्मान का अभाव — जितेंद्र कुशवाहा
विशेष संवाददाता सामाजिक जागरूकता टाइम्स लेखक: जितेंद्र कुशवाहा नई दिल्ली। समाजसेवी एवं चिंतक जितेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र के विकास, प्रगति और समृद्धि की आधारशिला उसके शिक्षक होते हैं। शिक्षक केवल विद्यालय या महाविद्यालय में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की शिक्षा देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाला एक सशक्त मार्गदर्शक होता है। एक शिक्षक ही बच्चों और युवाओं के भीतर ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करता है, जिससे वे आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश जिन वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, इंजीनियरों, प्रशासकों, सैनिकों, न्यायविदों और जनप्रतिनिधियों पर गर्व करता है, उन सभी के पीछे किसी न किसी शिक्षक का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक ही वह व्यक्ति है जो विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देता है और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए शिक्षक को केवल एक पेशेवर कर्मचारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माता के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए।

जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों और परंपराओं में गुरु का सम्मान सर्वोपरि माना गया है। इसके बावजूद आधुनिक समय में शिक्षकों के सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो सकी है। कई बार शिक्षकों की भूमिका को केवल शैक्षणिक दायित्वों तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनका योगदान समाज और राष्ट्र के समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला भी सिखाता है। वह उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाता है, नैतिक मूल्यों का महत्व बताता है तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देता है। शिक्षक की प्रेरणा से ही युवा वर्ग अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के उत्थान में भी योगदान देता है।

समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं को और अधिक मजबूत बनाया जाए। साथ ही समाज के प्रत्येक वर्ग को भी शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि देश को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाना है, तो शिक्षकों की भूमिका को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए आवश्यक है कि हम सभी शिक्षक समुदाय के योगदान को स्वीकार करें, उनका सम्मान बढ़ाएं और आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षकों के प्रति आदर का भाव रखने के लिए प्रेरित करें। एक सशक्त शिक्षक ही एक सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।


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