विशेष संवाददाता: हरिओम कुशवाहा, पटना (बिहार)। अखिल भारतीय युवा कुशवाहा समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि कुशवाहा ने कहा कि सम्राट अशोक के गौरवशाली वंशजों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, शिक्षा, जागरूकता और संगठन में निहित होती है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करेगा, तो समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के प्रति आस्था रखते हुए अपने अधिकारों की रक्षा तथा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक परिवर्तन का मार्ग हमेशा लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट अशोक केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व इतिहास के ऐसे महान शासक थे जिन्होंने सत्ता को जनकल्याण का माध्यम बनाया। कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने शांति, करुणा, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया। उनके शासनकाल में न्याय, नैतिकता और लोककल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के उत्थान की सबसे मजबूत आधारशिला है। जब तक समाज का प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, तब तक सामाजिक और आर्थिक प्रगति की गति सीमित रहेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ-साथ बेटियों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दें। शिक्षित महिला न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
नागमणि कुशवाहा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज का समय प्रतिस्पर्धा, तकनीक और नवाचार का है। युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, पत्रकारिता, कृषि, उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप और सामाजिक नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और शिक्षित युवा ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होता है। जब समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों, सम्मान और विकास के लिए कार्य करता है, तब उसकी आवाज़ अधिक प्रभावशाली बनती है। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, युवाओं और महिलाओं से आपसी सहयोग और समन्वय के साथ समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक हितों को प्राथमिकता देना ही समाज की वास्तविक प्रगति का मार्ग है।
राजनीतिक भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और संसद जैसे सभी लोकतांत्रिक मंचों पर समाज के योग्य, ईमानदार और शिक्षित प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। उन्होंने युवाओं से मतदान के प्रति जागरूक रहने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।
उन्होंने डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया समाज को जोड़ने तथा सकारात्मक संदेश पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। युवाओं को इन मंचों का उपयोग शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए। गलत सूचनाओं से बचते हुए तथ्यात्मक और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वच्छता, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, महिला सम्मान और सामाजिक सद्भाव जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक की विरासत हमें यह सिखाती है कि शक्ति का सर्वोत्तम उपयोग जनकल्याण, न्याय और मानव सेवा के लिए होना चाहिए। यदि समाज शिक्षा, संगठन, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़ेगा तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य का निर्माण होगा।
अपने संबोधन के अंत में नागमणि कुशवाहा ने सभी समाजबंधुओं से एकजुट रहने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, शिक्षा को जन-आंदोलन बनाने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठित, शिक्षित और जागरूक समाज ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएगा।
"हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी एकता, शिक्षा, संगठन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। आइए, सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प लें।"
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