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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

प्रयागराज में 18 अक्टूबर को युवाओं की बैठक, सामाजिक एकता और विकास पर होगा मंथन

प्रयागराज। समाज के युवाओं के बीच आपसी परिचय, संवाद, सहयोग और एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 18 अक्टूबर 2026, रविवार को प्रयागराज में एक महत्वपूर्ण सामाजिक बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक का उद्देश्य केवल युवाओं का एक स्थान पर एकत्रित होना नहीं, बल्कि समाज के जागरूक, सक्रिय एवं सकारात्मक सोच रखने वाले युवाओं को एक साझा मंच से जोड़ना है।

बैठक में युवाओं के करियर एवं रोजगार, व्यवसाय एवं स्वरोजगार, शिक्षा एवं मार्गदर्शन सहित सामाजिक कार्यों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर सकारात्मक चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही समाज के युवाओं को आपस में जोड़ने, समाज के वर्तमान एवं भविष्य को लेकर विचार-विमर्श तथा सामाजिक विकास के लिए प्रभावी पहल पर भी चर्चा होगी।

बैठक में कानूनी मदद एवं सलाह की आवश्यकता वाले समाज के लोगों के लिए सहयोग की व्यवस्था विकसित करने तथा जरूरतमंदों, दिव्यांगजनों और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सहायता कैसे उपलब्ध कराई जाए और उनकी मदद किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है, इस विषय पर भी विचार किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, प्रयागराज एवं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे युवाओं को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो सोशल मीडिया अथवा जमीनी स्तर पर समाज को जागरूक, संगठित और आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं।

यह पहल पूरी तरह गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक स्वरूप की होगी। आगामी 22 नवंबर 2026, रविवार को लखनऊ में प्रस्तावित बड़े सामाजिक कार्यक्रम की दिशा में 18 अक्टूबर की प्रयागराज बैठक को एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आयोजकों ने समाज के उन सभी युवाओं से बैठक में शामिल होने की अपील की है, जो सकारात्मक सोच रखते हैं, सामाजिक कार्यों में रुचि रखते हैं तथा अपने अनुभव, विचार और क्षमता के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

बैठक को लेकर सभी साथियों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं, ताकि कार्यक्रम की रूपरेखा को और बेहतर एवं प्रभावी बनाया जा सके। विशेष रूप से प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं से 18 अक्टूबर को अधिक से अधिक संख्या में बैठक में शामिल होने का आग्रह किया गया है।

इस पहल का संदेश है—
“परिचय से संवाद, संवाद से एकता और एकता से विकास।”

निवेदक :
MFG FOUNDATION

नोट: यह पहल सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले, जागरूक एवं सक्रिय साथियों को एक साझा मंच पर जोड़ने के उद्देश्य से की जा रही है।

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा

संघर्ष से सफलता तक: किसान के बेटे डॉ. ओमप्रकाश मौर्य बने NIT जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर

कैमूर (बिहार)। ग्राम भरखर, पोस्ट मोहनिया, जिला कैमूर (बिहार) के निवासी किसान धनंजय कुमार सिंह के पुत्र डॉ. ओमप्रकाश मौर्य का चयन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), जालंधर (पंजाब) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि को संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

धनंजय कुमार सिंह ने एम.ए. (हिंदी साहित्य) तक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे नौकरी की विशेष तैयारी नहीं कर सके। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खेती-बाड़ी के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हुए चारों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई।

उनका बड़ा पुत्र रेलवे में टाटानगर (झारखंड) में कार्यरत है, जबकि दूसरा पुत्र रेलवे में दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहा है। तीसरे पुत्र डॉ. ओमप्रकाश मौर्य ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है।

डॉ. ओमप्रकाश मौर्य ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आरबीएस स्कूल, मोहनिया से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS), वाराणसी से इंटरमीडिएट किया। आगे चलकर उन्होंने एमबीएम विश्वविद्यालय, जोधपुर से बी.टेक, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से एम.टेक तथा आईआईटी रुड़की से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके अतिरिक्त उन्होंने आईआईटी मद्रास में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध कार्य भी किया।

हाल ही में उनका चयन NIT जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है, जो न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे कैमूर जिले और बिहार के लिए गर्व की बात है।परिवार के सबसे छोटे पुत्र ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद एक निजी आईटीआई संस्थान में शिक्षक के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं।इस अवसर पर समाजसेवी एवं सामाजिक जागरूकता टाइम्स की पूरी टीम ने डॉ. ओमप्रकाश मौर्य को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

सामाजिक जागरूकता टाइम्स के संपादक एवं समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “डॉ. ओमप्रकाश मौर्य की यह उपलब्धि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का विषय है। एक किसान परिवार से निकलकर आईआईटी रुड़की से पीएचडी और एनआईटी जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर पद तक पहुंचना युवाओं के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।”उन्होंने कहा कि डॉ. मौर्य की उपलब्धि समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

बुधवार, 30 सितंबर 2026

अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टेस्ट 2026 में CSKM पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी ने जीता प्रथम स्थान

नई दिल्ली। अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टेस्ट 2026 के अंतर्गत CSKM पब्लिक स्कूल में स्कूल स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा और सृजनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्कूल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आचार्य महाप्रज्ञ अहिंसा प्रशिक्षण पुरस्कार 2011 से सम्मानित अहिंसा प्रशिक्षक सह अणुव्रतसेवी संजय भाई ने प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को ट्रॉफी प्रदान कर उसका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और जीवन में अहिंसा, अनुशासन, नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में CSKM पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल सुदर्शन सिंह, कॉर्डिनेटर वंदना सिंह एवं शिक्षाविद् डी. एन. चौधरी की भी उपस्थिति रही। विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों ने प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को रचनात्मक माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को मिली ट्रॉफी ने अन्य विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को महत्व देने का संदेश दिया।

रिपोर्ट: जितेन्द्र कुशवाहा


सोमवार, 14 सितंबर 2026

MFG Foundation का ‘युवा एवं परिचय संवाद’, शिक्षा से उद्यमिता तक युवाओं के सशक्तिकरण पर मंथन

                

रिपोर्ट: अमरेश कुमार मौर्य प्रकाशन तिथि: 14 सितंबर 2026लखनऊ, 13 सितंबर 2026। MFG Foundation की ओर से रविवार को लखनऊ में ‘युवा एवं परिचय संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर शिक्षा, करियर, रोजगार, व्यवसाय एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों और संभावनाओं पर संवाद करना तथा समाज के विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े युवाओं एवं सामाजिक रूप से सक्रिय साथियों ने सहभागिता की। संवाद के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित न रखते हुए उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन, रोजगार, व्यवसाय और उद्यमिता से जोड़कर आत्मनिर्भर एवं सक्षम बनाया जाए।

आगरा के सूरसदन में गूंजा KUSHWAH GEN-Z का दम, प्रतिभा सम्मान समारोह–2026 में उमड़ा कुशवाह समाज

MFG Foundation की ओर से संगठन के विजन एवं मिशन को साझा करते हुए बताया गया कि आने वाले समय में युवाओं के लिए Career Guidance, Education Support, Skill Development, Jobs, Business Networking और Entrepreneurship जैसे क्षेत्रों में ठोस पहल विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम में गांव और शहर के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने तथा ग्रामीण युवाओं को शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय के अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सक्रिय युवाओं, प्रोफेशनल्स, उद्यमियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया।

                    
संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा किए तथा समाजहित में मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित न रहकर साझेदारी, सहयोग और सामूहिक प्रयास के माध्यम से युवाओं के लिए बेहतर अवसर तैयार करना है।

MFG Foundation के प्रतिनिधियों के अनुसार, लखनऊ में आयोजित यह संवाद एक प्रारंभिक कदम है। आने वाले समय में इसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने तथा शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर कार्य करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में MFG Foundation के कोर सदस्य अमरेश मौर्य, दिनेश मौर्य, अरुण मौर्य, कुलदीप मौर्य एवं आशीष शाक्य ने सहभागिता की और युवाओं के साथ संवाद किया।

इस अवसर पर अमरेश मौर्य ने युवाओं के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक विजन रखते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए युवाओं को केवल अवसरों की तलाश करने वाला नहीं, बल्कि अवसरों का निर्माण करने वाला बनाना होगा। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, कौशल विकास और गांव से शहर तक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।

दिनेश मौर्य, अरुण मौर्य और कुलदीप मौर्य ने युवाओं को जोड़ने, जमीनी स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और सामाजिक कार्यों को संगठित रूप से आगे बढ़ाने को लेकर अपने विचार रखे।

आयोजकों ने कहा कि “परिचय से संवाद, संवाद से एकता और एकता से विकास” की भावना के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भविष्य में एक बड़े युवा नेटवर्क और आगामी युवा कार्यक्रमों की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है।

बुधवार, 19 अगस्त 2026

प्रकृति सेवा फाउंडेशन ने मनाया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस | बच्चों ने दी देशभक्ति प्रस्तुतियाँ

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा प्रकाशन तिथि: 19 अगस्त 2026

नई दिल्ली, 15 अगस्त। प्रकृति सेवा फाउंडेशन द्वारा भारत का 80वाँ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उमंग और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में कॉलोनी के बच्चों ने देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’, सदस्य सचिव एवं हिंदी अधिकारी, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, दिल्ली मध्य–1 (का.), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया (केंद्रीय विश्वविद्यालय), नई दिल्ली रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रवक्ता महंत प्रसाद, अवकाश प्राप्त शिक्षक गतिलाल, एमटीएनएल के अवकाश प्राप्त अधिकारी जयपाल तथा उदयभान पटेल उपस्थित रहे।

संस्था की कार्यकारिणी ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर अतिथियों ने बच्चों एवं उपस्थित नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’ ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में बच्चों को जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, शिक्षा, मेहनत और निरंतर प्रयास का महत्व बताया। उन्होंने बच्चों से लक्ष्य निर्धारित कर ईमानदारी एवं लगन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

वहीं महंत प्रसाद ने भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम एवं बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए हमारे वीर जवानों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा कि केवल ध्वजारोहण कर लेने या राष्ट्रीय पर्व मना लेने से ही सच्ची देशभक्ति सिद्ध नहीं होती। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की प्रगति और समाज की बेहतरी में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा की शुरुआत अपने घर, परिवार और कॉलोनी से की जा सकती है।

उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देने, समय का महत्व समझाने और बचपन से ही स्वच्छता की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से प्रत्येक कार्य समय पर करने तथा स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में उपाध्यक्ष दशरथ गोला, महासचिव गुलशन कुमार, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार गोला, कार्यालय प्रभारी लक्ष्मण गोला, मीडिया प्रभारी दिलीप, सचिव जितेंद्र गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य प्रेम सिंह कुंद्रा, राकेश कुमार जांगड़ा तथा युवा साथी आरव मौर्य का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, संस्था के पदाधिकारियों, सहयोगियों, अभिभावकों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा, स्वच्छता एवं शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने की अपील की।

अंततः राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

आजादी के 80 साल: युवाओं के सपनों का भारत कितना पूरा हुआ?

 

नई दिल्ली। भारत वर्ष 2027 में अपनी स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह अवसर केवल स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को स्मरण करने का नहीं, बल्कि पिछले आठ दशकों की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और आने वाले भारत की दिशा तय करने का भी है। विशेष रूप से युवाओं के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जिस भारत का सपना स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था और जिस विकसित, आत्मनिर्भर, आधुनिक तथा अवसरों से भरपूर भारत की कल्पना आज की पीढ़ी करती है, उस लक्ष्य को हमने कितना हासिल किया है?

स्वतंत्रता के समय भारत के सामने गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, कमजोर औद्योगिक आधार, सीमित संसाधन और सामाजिक असमानता जैसी अनेक चुनौतियां थीं। आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह उपलब्धियां बताती हैं कि पिछले 80 वर्षों में भारत ने लंबी यात्रा तय की है।

युवाओं के लिए बदला है अवसरों का संसार

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। आज का युवा केवल नौकरी पाने वाला युवा नहीं है, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी, तकनीक विकसित करने वाला इंजीनियर, शोधकर्ता, किसान-उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता, खिलाड़ी और वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला नागरिक भी है।

डिजिटल क्रांति ने युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं। इंटरनेट, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, स्टार्टअप और सोशल मीडिया ने छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर दिया है। आज कोई युवा अपने छोटे शहर से भी व्यवसाय शुरू कर सकता है, दुनिया के किसी भी हिस्से में अपनी सेवाएं पहुंचा सकता है और अपनी प्रतिभा को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर सकता है।

लेकिन केवल तकनीकी सुविधा उपलब्ध हो जाना ही सपनों के भारत की पूर्णता नहीं है।

रोजगार अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

भारत के युवाओं के सामने सबसे बड़ा प्रश्न गुणवत्तापूर्ण रोजगार और स्थायी आय का है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी की तलाश करते हैं, लेकिन उनकी शिक्षा और बाजार की जरूरतों के बीच अंतर दिखाई देता है।

इसलिए आने वाले वर्षों में केवल डिग्री देने के बजाय कौशल, रोजगार और उद्यमिता आधारित शिक्षा पर अधिक जोर देना होगा। युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले जिससे वे बदलती अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं। भारत को इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।

शिक्षा में प्रगति, लेकिन गुणवत्ता पर ध्यान जरूरी

स्वतंत्रता के समय देश में शिक्षा की स्थिति बेहद सीमित थी। आज स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का विस्तार हुआ है तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ी है।

फिर भी हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चे और युवा को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता का अंतर कम करना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, डिजिटल संसाधन और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत का सपना

स्वतंत्रता के 80वें वर्ष की ओर बढ़ते भारत के सामने आत्मनिर्भर और विकसित अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है। भारत ने विनिर्माण, स्टार्टअप, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल विदेशी वस्तुओं का विकल्प तैयार करना नहीं है। इसका अर्थ है—भारत में नवाचार, उत्पादन, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की मजबूत व्यवस्था तैयार करना।

युवाओं को इस परिवर्तन का केंद्र बनाना होगा। सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें युवा जोखिम लेकर नया व्यवसाय शुरू कर सकें और असफल होने के बाद भी दोबारा प्रयास कर सकें।

विकसित भारत केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं

सपनों का भारत केवल बड़ी अर्थव्यवस्था वाला भारत नहीं हो सकता। विकसित भारत का अर्थ ऐसा भारत होना चाहिए जहां हर नागरिक को सम्मान, सुरक्षा, न्याय और अवसर मिले।

महिलाओं की सुरक्षा और भागीदारी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वच्छ शहर और गांव, मजबूत सार्वजनिक परिवहन तथा गुणवत्तापूर्ण सरकारी सेवाएं भी विकसित भारत की पहचान होंगी।

युवाओं को भी यह समझना होगा कि देश निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। ईमानदारी से काम करना, कानून का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा करना, मतदान करना, सामाजिक भेदभाव का विरोध करना और जरूरतमंदों की मदद करना भी राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।

80 साल की उपलब्धियों का मूल्यांकन

अगर सवाल पूछा जाए कि आजादी के 80 साल बाद भारत ने अपने सपनों का कितना लक्ष्य हासिल किया है, तो इसका उत्तर न तो केवल उपलब्धियों की सूची में है और न ही केवल कमियों में।

भारत ने लंबी दूरी तय की है। आज देश आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर अपनी भूमिका निभा रहा है। लेकिन गरीबी, रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, सामाजिक असमानता और पर्यावरण जैसी चुनौतियां अभी भी हमारे सामने हैं।

इसलिए स्वतंत्रता के 80 वर्ष को उपलब्धियों के उत्सव के साथ आत्ममंथन का अवसर भी बनाया जाना चाहिए।

युवाओं के सपनों का भारत कैसा हो?

युवा जिस भारत का सपना देखते हैं, वह ऐसा भारत होना चाहिए जहां प्रतिभा को अवसर मिले, मेहनत का सम्मान हो, रोजगार के लिए पलायन मजबूरी न हो, गांवों में भी आधुनिक सुविधाएं हों, शिक्षा और स्वास्थ्य सबकी पहुंच में हों और युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो।

भारत की अगली यात्रा में युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्माता और भागीदार होंगे। आज का युवा यदि अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाए, तो स्वतंत्रता की अगली मंजिल और अधिक मजबूत होगी।

आजादी के 80 वर्ष हमें यह संदेश देते हैं कि भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन मंजिल अभी बाकी है। आने वाला भारत कैसा होगा, यह केवल नीतियों से नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की सोच, मेहनत, नवाचार और जिम्मेदारी से तय होगा।

इसलिए आज आवश्यकता है कि हम उपलब्धियों पर गर्व करें, कमियों को स्वीकार करें और अगले दशक के लिए स्पष्ट संकल्प लें—ऐसा भारत बनाने का, जहां हर युवा को अपने सपनों को साकार करने का समान अवसर मिले और भारत दुनिया के सामने विकास, लोकतंत्र, मानवता और सामाजिक समरसता का उदाहरण बने।

प्रस्तुति: सामाजिक जागरूकता टाइम्स

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

जनसंख्या के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर हो प्राथमिकता: दिनेश कुमार कुशवाहा

 

नई दिल्ली। प्रकृति सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश कुमार कुशवाहा ने कहा है कि यदि देश में बढ़ती जनसंख्या के आधार पर संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, तो उससे पहले आम नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सेवाओं का समान अनुपात में विस्तार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उसकी जनता होती है। ऐसे में विकास की प्राथमिकता आम नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना होना चाहिए। उनका कहना है कि देश के अनेक क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों का विलय किया जा रहा है, जबकि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा चुनाव, जनगणना और विभिन्न सरकारी कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।

लगनीरत्न सम्मान से सम्मानित हुए अमृततुल्य फाउंडेशन के संस्थापक अमित कुमार पंडित, सामाजिक सेवा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। इसके कारण मरीजों को लंबी प्रतीक्षा, समय पर उपचार न मिलने और आवश्यक जांच में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनका सुझाव है कि बढ़ती आबादी के अनुरूप स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार किया जाए।

रेल परिवहन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई ट्रेनों का संचालन स्वागत योग्य है, लेकिन सामान्य यात्रियों के लिए किफायती और सुलभ रेल सेवाओं का पर्याप्त विस्तार भी आवश्यक है। भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और टिकट संबंधी कठिनाइयों का समाधान जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप किया जाना चाहिए।

एनजीओ इंसाइड ने अपर्णा सर्व सेवा समिति को कैरम बोर्ड भेंट किया, जरूरतमंदों की मदद की अपील

उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के कारण नागरिकों को प्रमाण-पत्र, पेंशन, राजस्व, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक व्यवस्था को भी समय के साथ मजबूत बनाया जाना चाहिए।

दिनेश कुमार कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि सांसद लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं और उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि स्कूलों में शिक्षक, अस्पतालों में डॉक्टर, सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी और सार्वजनिक सेवाओं में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो केवल सांसदों की संख्या बढ़ाने से आम जनता की समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सांसदों की संख्या बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय से पहले शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए मजबूत किया जाए। साथ ही नागरिकों से भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

✍️ दिनेश कुमार कुशवाहा
अध्यक्ष, प्रकृति सेवा फाउंडेशन

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

सम्राट अशोक के आदर्शों पर चलकर समाज को शिक्षा, संगठन और राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ना होगा : नागमणि कुशवाहा

                                 

अखिल भारतीय युवा कुशवाहा समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने युवाओं से किया एकजुटता, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जागरूकता का आह्वान

विशेष संवाददाता: हरिओम कुशवाहा, पटना (बिहार)। अखिल भारतीय युवा कुशवाहा समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि कुशवाहा ने कहा कि सम्राट अशोक के गौरवशाली वंशजों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, शिक्षा, जागरूकता और संगठन में निहित होती है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करेगा, तो समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के प्रति आस्था रखते हुए अपने अधिकारों की रक्षा तथा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक परिवर्तन का मार्ग हमेशा लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट अशोक केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व इतिहास के ऐसे महान शासक थे जिन्होंने सत्ता को जनकल्याण का माध्यम बनाया। कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने शांति, करुणा, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया। उनके शासनकाल में न्याय, नैतिकता और लोककल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के उत्थान की सबसे मजबूत आधारशिला है। जब तक समाज का प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, तब तक सामाजिक और आर्थिक प्रगति की गति सीमित रहेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ-साथ बेटियों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दें। शिक्षित महिला न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

नागमणि कुशवाहा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज का समय प्रतिस्पर्धा, तकनीक और नवाचार का है। युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, पत्रकारिता, कृषि, उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप और सामाजिक नेतृत्व जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और शिक्षित युवा ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होता है। जब समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों, सम्मान और विकास के लिए कार्य करता है, तब उसकी आवाज़ अधिक प्रभावशाली बनती है। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, युवाओं और महिलाओं से आपसी सहयोग और समन्वय के साथ समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक हितों को प्राथमिकता देना ही समाज की वास्तविक प्रगति का मार्ग है।

राजनीतिक भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और संसद जैसे सभी लोकतांत्रिक मंचों पर समाज के योग्य, ईमानदार और शिक्षित प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। उन्होंने युवाओं से मतदान के प्रति जागरूक रहने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।

उन्होंने डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया समाज को जोड़ने तथा सकारात्मक संदेश पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। युवाओं को इन मंचों का उपयोग शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए। गलत सूचनाओं से बचते हुए तथ्यात्मक और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि समाज का विकास केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वच्छता, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, महिला सम्मान और सामाजिक सद्भाव जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक की विरासत हमें यह सिखाती है कि शक्ति का सर्वोत्तम उपयोग जनकल्याण, न्याय और मानव सेवा के लिए होना चाहिए। यदि समाज शिक्षा, संगठन, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़ेगा तो निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य का निर्माण होगा।

अपने संबोधन के अंत में नागमणि कुशवाहा ने सभी समाजबंधुओं से एकजुट रहने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, शिक्षा को जन-आंदोलन बनाने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठित, शिक्षित और जागरूक समाज ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

"हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी एकता, शिक्षा, संगठन और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। आइए, सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प लें।"


सोमवार, 3 अगस्त 2026

सभी नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत हैं माता सावित्रीबाई फुले : सविता सिंह कुशवाहा

 सविता सिंह कुशवाहा, उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन नई दिल्ली  भारत की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति के इतिहास में यदि किसी महान महिला का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है, तो वह हैं माता सावित्रीबाई फुले। उन्होंने उस समय महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ी, जब समाज में बेटियों को शिक्षा देना पाप समझा जाता था। आज देश की करोड़ों बेटियाँ विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रही हैं, प्रशासनिक सेवाओं से लेकर सेना, विज्ञान, न्यायपालिका, चिकित्सा, राजनीति और उद्योग जगत तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। यह परिवर्तन किसी एक दिन में नहीं आया, बल्कि इसके पीछे माता सावित्रीबाई फुले के संघर्ष, त्याग और दूरदर्शिता की अमिट छाप है।संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन की उपाध्यक्ष सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज यदि समाज में महिलाओं को सम्मान मिल रहा है, बेटियाँ शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, तो इसका सबसे बड़ा श्रेय माता सावित्रीबाई फुले को दिया जाना चाहिए। उन्होंने न केवल शिक्षा का दीप जलाया बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, समानता और सामाजिक न्याय की ऐसी नींव रखी, जिस पर आधुनिक भारत का निर्माण हुआ।

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उन्होंने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत थीं। उन्होंने समाज की उन कुरीतियों को चुनौती दी, जो महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखना चाहती थीं। जब लोग बेटियों को विद्यालय भेजने के विरोध में थे, तब उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय प्रारम्भ किया। यह केवल एक विद्यालय नहीं था, बल्कि महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की शुरुआत थी।

सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब सावित्रीबाई फुले पढ़ाने जाती थीं, तब कट्टरपंथी लोग उन पर पत्थर, कीचड़ और गोबर तक फेंकते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वे अपने साथ एक अतिरिक्त साड़ी लेकर निकलती थीं ताकि विद्यालय पहुँचकर गंदी हुई साड़ी बदल सकें और पूरे आत्मविश्वास के साथ छात्राओं को शिक्षा दे सकें। यह घटना हमें सिखाती है कि समाज परिवर्तन का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आज जब देश की बेटियाँ डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर, न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, खिलाड़ी, पत्रकार और जनप्रतिनिधि बन रही हैं, तब हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस परिवर्तन की शुरुआत सावित्रीबाई फुले ने ही की थी। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि यदि एक बेटी शिक्षित होती है, तो पूरा परिवार शिक्षित होता है और जब परिवार शिक्षित होगा, तभी राष्ट्र प्रगति करेगा।

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सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों में बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव, महिला हिंसा और शिक्षा से वंचित रहने जैसी समस्याएँ मौजूद हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से संभव है। माता सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें यही प्रेरणा देता है कि समाज में समान अवसर और समान सम्मान तभी मिलेगा, जब हर बेटी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि हमें केवल सावित्रीबाई फुले की जयंती या पुण्यतिथि पर उन्हें याद नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। प्रत्येक परिवार का यह संकल्प होना चाहिए कि वह अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाएगा, उसके सपनों का सम्मान करेगा और उसे आत्मनिर्भर बनने का अवसर देगा। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सविता सिंह कुशवाहा ने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भागीदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें नेतृत्व, प्रशासन, सामाजिक सेवा, राजनीति, विज्ञान, उद्यमिता और निर्णय लेने की प्रत्येक प्रक्रिया में समान अवसर मिलना चाहिए। जब महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिलेगा, तभी भारत वास्तव में विकसित और समतामूलक राष्ट्र बन सकेगा।

उन्होंने कहा कि आज देश की नई शिक्षा नीति भी बेटियों की शिक्षा पर विशेष बल देती है। सरकार की विभिन्न योजनाएँ—जैसे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', छात्रवृत्ति योजनाएँ तथा महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम—तभी सफल होंगे जब समाज स्वयं अपनी सोच बदलेगा। समाज की मानसिकता में परिवर्तन लाने के लिए माता सावित्रीबाई फुले के विचार आज पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।

"आज जिस बेटी को शिक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है, उसका सबसे बड़ा श्रेय माता सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और सामाजिक क्रांति को जाता है। हमें उनके विचारों को घर-घर तक पहुँचाना होगा।"
                                                                         सविता सिंह कुशवाहा
                                                    उपाध्यक्ष, संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन

उन्होंने कहा कि संसार जनकल्याण एक किरण फाउंडेशन निरंतर महिलाओं और बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन तथा सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य कर रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, शिक्षित और आत्मविश्वासी बनाना है। संस्था समय-समय पर महिला जागरूकता अभियान, शिक्षा सहायता, कौशल विकास, स्वास्थ्य शिविर तथा सामाजिक चेतना कार्यक्रम आयोजित करती है, ताकि समाज में समानता और सम्मान की भावना मजबूत हो।

सविता सिंह कुशवाहा ने युवाओं से भी विशेष अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में शिक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता का संदेश फैलाने का माध्यम बनाएं। यदि युवा पीढ़ी सावित्रीबाई फुले के विचारों को अपनाती है, तो आने वाला भारत और अधिक शिक्षित, जागरूक तथा समानता पर आधारित होगा।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम हर बेटी को यह विश्वास दिलाएँ कि वह किसी से कम नहीं है। उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार है और समाज का दायित्व है कि वह उसके मार्ग की बाधाएँ दूर करे। जब प्रत्येक बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर होगी, तभी भारत विश्व में वास्तविक अर्थों में एक विकसित और सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

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अंत में सविता सिंह कुशवाहा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले का जीवन केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने संघर्ष से यह सिद्ध किया कि शिक्षा सबसे बड़ी शक्ति है और ज्ञान से ही सामाजिक परिवर्तन संभव है। आज हम जिस आधुनिक भारत का सपना देखते हैं, उसकी मजबूत नींव सावित्रीबाई फुले जैसे महान समाज सुधारकों ने रखी है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाए और शिक्षा, समानता तथा महिला सम्मान के उनके मिशन को आगे बढ़ाए।

माता सावित्रीबाई फुले का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—"शिक्षित बनो, जागरूक बनो और समाज को समानता की राह पर आगे बढ़ाओ।" यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

रिपोर्ट : जितेन्द्र कुशवाहा
संपादक, सामाजिक जागरूकता टाइम्स


शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

राज्यपाल से शोध छात्र की मांग, 211 नए डिग्री कॉलेजों में सभी विषय शुरू करने का आश्वासन |


 

आरा (बिहार), 17 जुलाई 2026 | संवाददाता: जितेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार द्वारा 211 नवसृजित डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय पहल है। लेकिन इन महाविद्यालयों में सभी विषयों का पठन-पाठन प्रारंभ नहीं होने से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अपनी रुचि के विषयों में अध्ययन का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री सैयद अता हसनैन से आग्रह किया कि नवसृजित महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र, संस्कृत सहित सभी विषयों में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि राज्य के ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा अपने जिले में ही उपलब्ध हो सके।

नीतीश कुमार कुशवाहा की मांग पर माननीय राज्यपाल ने सकारात्मक संज्ञान लेते हुए आश्वासन दिया कि इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी विषयों के संचालन की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।

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