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मंगलवार, 14 जुलाई 2026

सेल्फी नहीं, संरक्षण की सोच अपनाएँ: पौधा तभी लगाएँ जब उसकी देखभाल कर सकें – जितेंद्र कुशवाहा


सेल्फी नहीं, संरक्षण की सोच अपनाएँ: पौधा तभी लगाएँ जब उसकी देखभाल कर सकें

आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है। बढ़ता प्रदूषण, घटते जंगल, जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी हमें लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अब भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की कल्पना करना कठिन होगा। ऐसे समय में देशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि लगाए गए पौधों में से कितने वास्तव में वृक्ष बन पाते हैं?

अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी सरकारी अभियान, सामाजिक कार्यक्रम या सोशल मीडिया पर फोटो साझा करने के उद्देश्य से पौधे लगा देते हैं। पौधारोपण के बाद कुछ तस्वीरें ली जाती हैं, प्रशंसा मिलती है और फिर पौधों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। पानी, सुरक्षा और देखभाल के अभाव में अधिकांश पौधे कुछ ही समय में सूख जाते हैं। ऐसे में पौधारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखना और वृक्ष बनने तक उनका पालन-पोषण करना है। एक पौधे को वृक्ष बनने में कई वर्षों का समय लगता है। इस दौरान नियमित सिंचाई, उचित खाद, पशुओं से सुरक्षा और समय-समय पर देखभाल आवश्यक होती है। यदि यह जिम्मेदारी नहीं निभाई जाती, तो पौधारोपण केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।

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पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कम पौधे भी लगाए जाएँ, लेकिन उनकी पूरी देखभाल की जाए, तो उसका लाभ हजारों सूखे पौधों से कहीं अधिक होगा। एक विकसित वृक्ष न केवल ऑक्सीजन देता है, बल्कि वातावरण को शुद्ध करता है, तापमान कम करता है, भूजल संरक्षण में मदद करता है और जैव विविधता को भी सुरक्षित रखता है।

विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी विभागों को भी वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि प्रत्येक पौधे की जिम्मेदारी किसी व्यक्ति, संस्था या समूह को दी जाए, तो उनके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ सकती है।

इस अवसर पर सामाजिक जागरूकता टाइम्स के संपादक जितेंद्र कुशवाहा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा—

"पौधा तभी लगाएँ, जब आप उसके पालन-पोषण का संकल्प ले सकें। केवल 1–2 सेल्फी या औपचारिकता के लिए नर्सरी में पल रहे एक जीवित पौधे की जान न लें। वृक्षारोपण का वास्तविक उद्देश्य पौधे को वृक्ष बनाना होना चाहिए, न कि केवल फोटो खिंचवाना।"

उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में केवल एक पौधे की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा ले, तो देश को हरा-भरा बनाने का सपना साकार हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण सरकार या किसी संस्था की अकेली जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

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आज आवश्यकता इस बात की है कि पौधारोपण को केवल अभियान या उत्सव तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे जनभागीदारी और जिम्मेदारी का आंदोलन बनाया जाए। जब तक लगाया गया पौधा एक मजबूत वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसकी देखभाल करना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है।

संदेश:
"सेल्फी के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए पौधे लगाइए। पौधा लगाना शुरुआत है, उसे वृक्ष बनाना हमारी जिम्मेदारी है।"

रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाहा
प्रकाशन: सामाजिक जागरूकता टाइम्स
प्रकाशन तिथि: 14 जुलाई 2026 (मंगलवार)

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