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मंगलवार, 16 जून 2026

वर्षा ऋतु से पहले पेड़ों की वैज्ञानिक छंटाई आवश्यक: दिनेश कुमार कुशवाहा

 


दिनेश कुमार कुशवाहा

अध्यक्ष, प्रकृति सेवा फाउंडेशन

प्रकृति हमारे जीवन का आधार है। पेड़-पौधे न केवल हमें शुद्ध वायु, छाया और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करते हैं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए पेड़ों का संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। किंतु संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी समय-समय पर देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन करना भी है।

मई, जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में देश के अधिकांश भागों में तेज आंधी, तूफान और वर्षा का दौर शुरू हो जाता है। वसंत ऋतु के बाद लगभग सभी पेड़ों में नई पत्तियां, शाखाएं और टहनियां निकल आती हैं, जिससे वे घने और भारी हो जाते हैं। दूसरी ओर, शहरों और कस्बों की सड़कों के किनारे वर्षों पहले लगाए गए अनेक पेड़ अब काफी पुराने हो चुके हैं। इनमें से कई पेड़ बाहर से स्वस्थ दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर से खोखले, कमजोर या दीमकग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे पेड़ों की सूखी और कमजोर शाखाएं किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

तेज आंधी और बारिश के दौरान कमजोर शाखाएं अचानक टूटकर सड़क पर गिर जाती हैं। कई बार पूरा पेड़ ही जड़ से उखड़ जाता है। इससे लोगों की जान जोखिम में पड़ती है, वाहन क्षतिग्रस्त होते हैं, बिजली की लाइनें टूट जाती हैं तथा सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचता है। समाचार माध्यमों में अक्सर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, जिनमें पेड़ या शाखा गिरने से लोगों की मृत्यु तक हो जाती हैhttps://www.samajikjagruktatimes.in/2026/01/bws-2026.html

इन दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए वन विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को वर्षा ऋतु से पहले विशेष अभियान चलाना चाहिए। सड़क किनारे, पार्कों, विद्यालयों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगे पेड़ों का निरीक्षण किया जाना आवश्यक है। जिन पेड़ों की शाखाएं सूख चुकी हैं, जो अंदर से खोखले हैं, जिनकी टहनियां अत्यधिक कमजोर हैं अथवा जिन पर पत्तियों का भार बहुत अधिक हो गया है, उनकी वैज्ञानिक तरीके से छंटाई कराई जानी चाहिए।

यह भी जरूरी है कि छंटाई केवल औपचारिकता न बनकर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार की जाए। स्वस्थ पेड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल जोखिम वाली शाखाओं को हटाया जाए। इससे पेड़ों का संरक्षण भी होगा और आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

आंधी-बारिश से पहले पेड़ों की छंटाई और जन सुरक्षा पर विचार रखते दिनेश कुमार कुशवाहा, अध्यक्ष प्रकृति सेवा फाउंडेशन
सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसी क्षेत्र में कोई पेड़ कमजोर, झुका हुआ या खतरनाक स्थिति में दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दी जानी चाहिए। जनभागीदारी से यह अभियान और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

पेड़ हमारे मित्र हैं और पर्यावरण की अमूल्य धरोहर हैं। उनका संरक्षण आवश्यक है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते कमजोर शाखाओं और जोखिमपूर्ण पेड़ों की पहचान कर उनकी उचित छंटाई कर दी जाए, तो अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसलिए वर्षा और आंधी के मौसम से पहले इस दिशा में गंभीर और योजनाबद्ध पहल की आवश्यकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल पेड़ लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी नियमित देखभाल, संरक्षण और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दें। यही सच्चे अर्थों में पर्यावरण संरक्षण और जनहित की सेवा होगी।


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