जनपथ मार्केट: इतिहास, विरासत और आधुनिक दिल्ली की पहच
लेखक: जितेंद्र कुशवाहानई दिल्ली की पहचान केवल संसद भवन, इंडिया गेट और कर्तव्य पथ तक सीमित नहीं है। राजधानी की सांस्कृतिक और व्यावसायिक धड़कन को समझना हो तो जनपथ मार्केट का रुख करना चाहिए। कनॉट प्लेस के निकट स्थित यह बाजार वर्षों से देश-विदेश के पर्यटकों, युवाओं, कलाकारों और खरीदारी के शौकीनों का पसंदीदा केंद्र बना हुआ है। जनपथ केवल एक बाजार नहीं, बल्कि भारत की विविध संस्कृति, हस्तशिल्प और उद्यमिता का जीवंत प्रतीक है।
ब्रिटिश शासन के दौरान आज के जनपथ मार्ग को "क्वीन्स वे" के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद औपनिवेशिक नामों को भारतीय पहचान देने की प्रक्रिया में इसका नाम बदलकर "जनपथ" रखा गया, जिसका अर्थ है "जनता का मार्ग"। नई दिल्ली के विकास के साथ इस क्षेत्र ने भी तेजी से व्यावसायिक रूप धारण किया और देखते ही देखते यह राजधानी के प्रमुख बाजारों में शामिल हो गया।
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जनपथ मार्केट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सांस्कृतिक विविधता है। यहां कश्मीर के पश्मीना शॉल, राजस्थान की हस्तनिर्मित कलाकृतियां, गुजरात की कढ़ाई, पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक उत्पाद, तिब्बती हस्तशिल्प और भारतीय कारीगरों द्वारा निर्मित अनेक आकर्षक वस्तुएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। यही कारण है कि विदेशी पर्यटक भारतीय संस्कृति की झलक अपने साथ स्मृति-चिह्न के रूप में यहां से लेकर जाते हैं।
यह बाजार विशेष रूप से युवाओं के बीच फैशन हब के रूप में लोकप्रिय है। आधुनिक डिजाइन की कुर्तियां, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी, हैंडबैग, स्कार्फ, फैशन एक्सेसरीज और घरेलू सजावटी वस्तुएं यहां किफायती दामों पर उपलब्ध होती हैं। यहां खरीदारी का सबसे रोचक अनुभव मोलभाव की परंपरा है, जो भारतीय बाजार संस्कृति की विशेष पहचान मानी जाती है।
आज डिजिटल युग में भी जनपथ मार्केट अपनी लोकप्रियता बनाए हुए है। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते प्रभाव के बावजूद लोग यहां खरीदारी के साथ-साथ दिल्ली की जीवंत संस्कृति का अनुभव लेने आते हैं। दिल्ली मेट्रो की बेहतर कनेक्टिविटी ने इस बाजार तक पहुंचना और भी आसान बना दिया है। जनपथ और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से यह बाजार पैदल दूरी पर स्थित है।
नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) द्वारा समय-समय पर बाजार के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार के प्रयास किए गए हैं। इससे बाजार अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यटकों के अनुकूल बना है। हालांकि पार्किंग की समस्या, बढ़ती भीड़ और ऑनलाइन बाजार की प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं।
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जनपथ मार्केट हजारों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और हस्तशिल्प कलाकारों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। यहां का प्रत्येक स्टॉल भारत की किसी न किसी कला, परंपरा और स्थानीय उद्यम की कहानी कहता है। ऐसे बाजार न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं, बल्कि "वोकल फॉर लोकल" और "मेक इन इंडिया" जैसे अभियानों को भी वास्तविक आधार प्रदान करते हैं।
भविष्य में यदि जनपथ मार्केट में विरासत संरक्षण, डिजिटल सूचना प्रणाली, स्मार्ट पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाती हैं, तो यह विश्व के प्रमुख स्ट्रीट मार्केट्स में और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है।
जनपथ मार्केट दिल्ली की उस जीवंत पहचान का नाम है, जहां इतिहास और आधुनिकता साथ-साथ चलते हैं। यहां खरीदारी केवल वस्तुएं खरीदना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और परंपरा को करीब से महसूस करने का अवसर है। यही कारण है कि जनपथ आज भी राजधानी की शान और भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है।
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