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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

संघर्ष से सफलता तक: किसान के बेटे डॉ. ओमप्रकाश मौर्य बने NIT जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर

कैमूर (बिहार)। ग्राम भरखर, पोस्ट मोहनिया, जिला कैमूर (बिहार) के निवासी किसान धनंजय कुमार सिंह के पुत्र डॉ. ओमप्रकाश मौर्य का चयन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), जालंधर (पंजाब) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि को संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

धनंजय कुमार सिंह ने एम.ए. (हिंदी साहित्य) तक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे नौकरी की विशेष तैयारी नहीं कर सके। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खेती-बाड़ी के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हुए चारों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई।

उनका बड़ा पुत्र रेलवे में टाटानगर (झारखंड) में कार्यरत है, जबकि दूसरा पुत्र रेलवे में दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहा है। तीसरे पुत्र डॉ. ओमप्रकाश मौर्य ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है।

डॉ. ओमप्रकाश मौर्य ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आरबीएस स्कूल, मोहनिया से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS), वाराणसी से इंटरमीडिएट किया। आगे चलकर उन्होंने एमबीएम विश्वविद्यालय, जोधपुर से बी.टेक, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से एम.टेक तथा आईआईटी रुड़की से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके अतिरिक्त उन्होंने आईआईटी मद्रास में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध कार्य भी किया।

हाल ही में उनका चयन NIT जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है, जो न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे कैमूर जिले और बिहार के लिए गर्व की बात है।परिवार के सबसे छोटे पुत्र ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद एक निजी आईटीआई संस्थान में शिक्षक के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं।इस अवसर पर समाजसेवी एवं सामाजिक जागरूकता टाइम्स की पूरी टीम ने डॉ. ओमप्रकाश मौर्य को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

सामाजिक जागरूकता टाइम्स के संपादक एवं समाजसेवी जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “डॉ. ओमप्रकाश मौर्य की यह उपलब्धि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का विषय है। एक किसान परिवार से निकलकर आईआईटी रुड़की से पीएचडी और एनआईटी जालंधर में असिस्टेंट प्रोफेसर पद तक पहुंचना युवाओं के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।”उन्होंने कहा कि डॉ. मौर्य की उपलब्धि समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

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